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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में सोमवार को एआई तकनीक से लैस नई डायल-112 सेवा के नए वाहन और फॉरेंसिक मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाई। इसी के साथ सेवा का दायरा सभी 33 जिलों तक हो गया है। नई गाड़ियां पुलिस, एंबुलेंस और दूसरी आपात सेवाओं की जल्द पहुंच बढ़ाएंगी। फॉरेंसिक मोबाइल वैन घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक सबूत जुटाने और शुरुआती जांच कर सकेंगी। इससे आपराधिक मामलों में पुख्ता साक्ष्य जुटाने में मदद मिलेगी। नई व्यवस्था में एआई आधारित लोकेशन पहचान तकनीक जोड़ी गई है। इससे संकट में फंसे व्यक्ति की सटीक लोकेशन का पता लगाने में मदद मिलेगी। इससे सहायता टीम को कम समय में मौके तक पहुंचने में आसानी होगी। राजधानी में कार्यक्रम में सीएम विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी मौजूद थे। 2018 में डायल-112 सेवा शुरू हुई, ये 16 जिलों तक सीमित थी। बैकअप कंट्रोल सेंटर :तकनीकी बाधा या आपदा के दौरान सेवा प्रभावित न हो, इसके लिए सिविल लाइंस स्थित मुख्य कंट्रोल रूम के अलावा नया रायपुर पुलिस मुख्यालय में बैकअप कंट्रोल सेंटर भी बनाया गया है। यह जरूरत पड़ने पर स्वतः काम शुरू कर देगा। ऑन द स्पॉट मिलेंगे वैज्ञानिक सबूत: 33 जिलों के लिए आधुनिक फॉरेंसिक मोबाइल लैब तैयार की गई हैं। इनमें से 32 वैन को मैदानी कार्य के लिए रवाना किया गया है। वैन में खून जांच किट, डिजिटल साक्ष्य जुटाने के उपकरण, सीसीटीवी फुटेज निकालने की प्रणाली, जीपीएस, लैपटॉप, कंप्यूटर, जनरेटर और नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं। इससे फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर सबूत नष्ट होने से पहले उन्हें सुरक्षित कर सकेगी। महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन, निगरानी सुविधाएं भी राज्य में 400 नई डायल-112 इमरजेंसी गाड़ियां, 33 विशेष निगरानी वाहन और 60 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन रवाना हुए। लोग अब फोन कॉल के अलावा 112 इंडिया एप, एसएमएस, ईमेल, वेब प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और एआई आधारित संवाद सुविधा के जरिए भी मदद मांग सकेंगे। महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और निगरानी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इससे पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और महिला हेल्पलाइन जैसी सेवाएं एक मंच से जुड़ेंगी। बस्तर में 50 सालों में जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई तीन-चार साल में करेंगे: अमित शाह देश को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त घोषित करने के बाद केंद्रीय गृह अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर बस्तर पहुंचे। उनका यह दौरा बस्तर में सुरक्षा और विकास के नए मॉडल की शुरुआत माना जा रहा है। शाह ने साफ कहा कि बस्तर में अब ‘खूनी गनतंत्र’ का दौर खत्म हो चुका है और आने वाले वर्षों में आदिवासियों के अधिकार, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं पर तेजी से काम होगा। उन्होंने कहा कि बस्तर को पिछले 50 वर्षों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई अगले 4-5 वर्षों में की जाएगी। शाह सेना के विशेष विमान से जगदलपुर पहुंचे, जहां सीएम विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा व अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से नेतानार पहुंचे। यहां उन्होंने आदिवासी महिलाओं से मुलाकात कर स्वरोजगार और आजीविका से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। गुंडाधुर की धरती बनेगी तीर्थस्थल, 3 अहम बातें 1. सुरक्षा कैंप अब बने जन सुविधा केंद्र : बस्तर के शहीद गुंडाधुर की जन्मस्थली में देश के पहले सुरक्षा कैंप-टू-पब्लिक सर्विस सेंटर का उद्घाटन किया। अब बस्तर के अंदरूनी इलाकों में बने सुरक्षा बलों के कैंप केवल नक्सलियों से लड़ने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय आदिवासियों को राशन, आधार कार्ड, आयुष्मान भारत, प्राथमिक शिक्षा (आंगनबाड़ी), डिजिटल गवर्नेंस और स्वास्थ्य सुविधाएं देने का हब बनेंगे। 2. बस्तर के शहीदों को नमन: शाह ने अमर वाटिका में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। एकेडमी में जवानों, नक्सल पीड़ितों, मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों से संवाद किया। 3 सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक में विशेष पैकेज की उम्मीद: मंगलवार को शाह जगदलपुर में केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के सीएम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीएम शामिल होंगे। इसमें बस्तर के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की उम्मीद भी है।
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डायल-112:गृहमंत्री अमित शाह ने फॉरेंसिक वैन और नए वाहन रवाना किए













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