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माघ मेला प्रकरण में पूर्व सीबीआई निदेशक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम. नागेश्वर राव की अध्यक्षता में एक नागरिक समिति का गठन किया गया था। जिसकी रिपोर्ट सामने आने के बाद वाराणसी में उसे साझा किया गया जिसमें ज्योतिर्मठ शंकराचार्य के साथ हुई घटनाओं को राज्य शक्ति के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बताया गया है। कमेटी ने कहा – पालकी से उतरने को कहा गया, जिससे एक प्राचीन धार्मिक परंपरा बाधित हुई प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए मामले पर पूर्व सीबीआई निदेशक एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एम. नागेश्वर राव अपनी बात रखी उन्होंने कहा समिति के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य पारंपरिक पालकी शोभायात्रा के माध्यम से संगम स्नान के लिए जा रहे थे। यह यात्रा प्रशासन की पूर्व जानकारी और पुलिस सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक आगे बढ़ रही थी। प्रतिवेदन में कहा गया है कि संगम के निकट अंतिम चरण में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा शोभायात्रा को रोक दिया गया तथा शंकराचार्य से पालकी से उतरने को कहा गया, जिससे एक प्राचीन धार्मिक परंपरा बाधित हुई। हालांकि प्रशासन ने इस कार्रवाई को संभावित भगदड़ की आशंका के आधार पर उचित ठहराने का प्रयास किया, लेकिन समिति ने वीडियो साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर ऐसी किसी तात्कालिक स्थिति से इनकार किया है। समिति का कहना है कि घटना के बाद औचित्य सिद्ध करने के लिए यह कारण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि श्रद्धालुओं पर बल प्रयोग किया गया तथा वेद विद्यार्थियों और बटुकों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें शिखा पकड़कर घसीटा गया। समिति के अनुसार, यह केवल भीड़ नियंत्रण नहीं बल्कि धार्मिक गरिमा और परंपरा में हस्तक्षेप था। समिति ने मुख्यमंत्री से शंकराचार्य से संवाद करने के लिए कहा समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि वे स्वयं पहल कर ज्योतिर्मठ शंकराचार्य से संवाद स्थापित करें, संबंधित अधिकारियों से सार्वजनिक क्षमा-याचना कराएं तथा उनकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें। साथ ही “उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद” नामक एक स्वायत्त वैधानिक निकाय के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिसकी अध्यक्षता ज्योतिर्मठ शंकराचार्य करें। परिषद में मंदिरों, अखाड़ों और मठों सहित विभिन्न पारंपरिक धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करने की अनुशंसा की गई है। अंत में समिति ने कहा कि सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी मानी जाने वाली काशी से इस प्रतिवेदन का जारी होना केवल प्रयागराज की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य और धार्मिक स्वायत्तता के व्यापक संबंधों पर राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता को दर्शाता है। सामजसेवी रितु राठौर ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप रितु राठौर ने कहा – समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि मेला प्रशासन ने शंकराचार्य के साथ अनुचित व्यवहार किया और उन्हें रोकने का निर्णय प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को भीड़ और सुरक्षा की चिंता थी तो पहले ही अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। लेकिन पूरा जुलूस आने देने के बाद अंतिम समय में रोकना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। राठौर के अनुसार, उस समय प्रयागराज के सीपीओ का बयान आया था कि शंकराचार्य जी को अनुमति नहीं थी, जबकि समिति की जांच में ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे पता चलता है कि उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से अनुमति दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद न तो किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही कोई आधिकारिक जांच समिति गठित की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अंत में रितु राठौर ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग शंकराचार्य जी का सम्मान वापस दिलाने और दोषी अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करने की है।
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नागरिक समिति ने माघ मेले का रिपोर्ट किया जारी:पूर्व सीबीआई निदेशक बोले- शंकराचार्य की अध्यक्षता में बने उत्तर प्रदेश हिंदू धर्म परिषद का हो गठन














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