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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश का बाल संरक्षण और पुनर्वास तंत्र कितना संवेदनशील और मजबूत हो चुका है, इसका एक बेहद भावुक उदाहरण राजधानी लखनऊ में सामने आया है। करीब दो वर्षों से अपने घर से लापता एक मूक-बधिर (बोलने और सुनने में असमर्थ) बच्चे को मोहान रोड स्थित राजकीय बालगृह के प्रयासों से उसके परिवार से दोबारा मिला दिया गया। परिवार ने जिस बेटे के वापस लौटने की उम्मीद पूरी तरह छोड़ दी थी, उसे सकुशल पाकर शुक्रवार को पश्चिम बंगाल से आए परिजनों के आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक होकर यूपी सरकार और अधिकारियों को बार-बार धन्यवाद दिया। चुनौती बड़ी थी, पर बालगृह प्रशासन ने नहीं मानी हार बाल कल्याण समिति मेरठ के आदेश पर 12 सितंबर 2025 को करीब 13 वर्षीय इस मूक-बधिर बालक को लखनऊ के मोहान रोड स्थित राजकीय बालगृह (बालक) में लाया गया था। बच्चा बोल और सुन नहीं सकता था, जिसके कारण वह अपना नाम, माता-पिता का नाम या घर का पता बताने में पूरी तरह असमर्थ था। इतनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बालगृह प्रशासन और अधिकारियों ने हार नहीं मानी। बालक की अच्छी देखभाल करने के साथ-साथ उसकी पहचान खोजने के प्रयास लगातार जारी रखे गए। फिंगरप्रिंट स्कैन करते ही सामने आ गया बंगाल का पता बालक की पहचान स्थापित करने के लिए बालगृह प्रशासन ने एक अनूठी पहल की। प्रशासन ने बच्चे का नया पहचान पत्र (Aadhaar Card) बनवाने की प्रक्रिया शुरू की। जैसे ही इस प्रक्रिया के तहत बायोमेट्रिक स्कैन मशीन पर बच्चे की उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट) लिए गए, सिस्टम में उसका पुराना रिकॉर्ड सामने आ गया। रिकॉर्ड खुलते ही पता चला कि बच्चे का नाम ‘रमजान’ है और वह पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के गंगासार गांव का रहने वाला है। घर का सही पता मिलते ही लखनऊ बालगृह प्रशासन ने तुरंत बंगाल में संबंधित स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया और परिवार तक बेटे के सुरक्षित होने की सूचना पहुंचाई। बेटे की सूचना मिलते ही भावुक हुआ परिवार घर में जैसे ही रमजान के जिंदा और सुरक्षित होने की खबर मिली, पूरा परिवार खुशी से रो पड़ा। रमजान करीब दो साल पहले अचानक घर से लापता हो गया था और परिजन उसे हर जगह ढूंढकर थक चुके थे। इस पूरे खोज अभियान और कागजी कार्रवाई को पूरा करने में मेरठ मंडल के उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी एवं उप निदेशक पुनीत मिश्रा का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा। शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे माता-पिता को जब कागजी औपचारिकताएं पूरी कर बच्चा सौंपा गया, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। संवेदनशील शासन और मानवता की बड़ी मिसाल महिला कल्याण निदेशालय की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि योगी सरकार बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और उनके पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि एक ऐसे बच्चे की पहचान स्थापित करना जो बोल-सुन नहीं सकता, बेहद मुश्किल काम था। लेकिन टीम की लगन और आधुनिक तकनीक के सही इस्तेमाल से आखिरकार रमजान को उसके माता-पिता तक पहुंचाना संभव हो सका। यह सिर्फ एक प्रशासनिक सफलता नहीं है, बल्कि संवेदनशील शासन और मानवता की एक बड़ी मिसाल है।
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बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट से मिला घर का रास्ता:लखनऊ बालगृह के प्रयास से 2 साल बाद माता-पिता को मिला मूक-बधिर बेटा; योगी सरकार को कहा 'शुक्रिया'















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