बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा महिला बंदी यौन उत्पीड़न विवाद:महिला बंदी का निजी लैब में प्रेग्नेंसी टेस्ट क्यों?…सवाल उठा तो सीएस को जांच के लिए भेजा पत्र




बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में महिला बंदी से जुड़े मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। आरोप है कि जेल प्रशासन ने बिना किसी औपचारिक जांच टीम के गठन के ही महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट प्राइवेट लैब में करा दिया। इसे लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब जेल प्रशासन को महिला बंदी के गर्भवती होने की आशंका हुई, तब जेल डॉक्टरों की टीम के माध्यम से आनन-फानन में जांच कराई गई। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील स्थिति में बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए प्राइवेट लैब में टेस्ट क्यों कराया गया। उस समय न तो कोई अधिकृत जांच टीम बनाई गई थी और न ही पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई। बताया गया कि पीड़िता ने शुरुआत में प्रेग्नेंसी टेस्ट कराने से साफ इंकार कर दिया था। बाद में उसे समझाने के बाद ब्लड सैंपल लिया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद जेल प्रबंधन ने अब सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जांच कराने का आग्रह किया है। पत्र में महिला बंदी का ब्लड सैंपल लेने को कहा गया है। डीसी ने दिए जांच के आदेश: डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने एडीएम (विधि-व्यवस्था) और एसडीएम स्तर के अफसरों यह को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रक्रिया का पालन नहीं, प्राइवेट लैब में जांच… महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट जिस लैब में कराया गया, उसका इस्तेमाल आमतौर पर जेल प्रशासन तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों में करता है। जेल सूत्रों के अनुसार, जब किसी कैदी की अचानक तबीयत बिगड़ती है या तुरंत मेडिकल रिपोर्ट की जरूरत होती है, तब इसी तरह की लैब से जांच कराई जाती है, ताकि प्राथमिक स्थिति का आकलन किया जा सके। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ऐसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में महिला बंदी की जांच के लिए पहले सिविल सर्जन को आग्रह पत्र भेजना जरूरी माना जाता है। आरोप है कि इस मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। जेल के डॉक्टरों ने सीधे सैंपल लेकर उसे प्राइवेट लैब भेज दिया और जांच रिपोर्ट में महिला बंदी को गर्भवती नहीं बताया गया। सीधी बात चंद्रशेखर, जेल सुपरिटेंडेंट जेलर जांच के लिए अधिकृत, उनके निर्देश पर जेल डॉक्टरों ने जांच कराई प्रेग्नेंसी टेस्ट किसकी अनुमति से हुआ? -जेल प्रशासन को जानकारी मिली, तो तत्काल जरूरत को देखते हुए जेलर के निर्देश पर जेल डॉक्टरों की टीम ने जांच कराई। जांच कराने के लिए जेलर अधिकृत हैं। उन्हें किसी अलग अनुमति की जरूरत नहीं होती। क्या पीड़िता ने इसके लिए सहमति दी थी? -शुरुआत में पीड़िता ने टेस्ट कराने से इंकार किया था, लेकिन बाद में समझाने के बाद उसने सैंपल देने की सहमति दे दी। क्या निजी लैब सरकारी मान्यता प्राप्त है? -जेल में जब किसी कैदी की तत्काल स्वास्थ्य जांच की जरूरत होती है, तो इसी लैब में जांच कराई जाती है। अगर किसी तरह का संदेह हो या वरीय अधिकारियों का निर्देश मिले, तो रिम्स या सदर अस्पताल में भी जांच कराई जाती है। इतनी गंभीर स्थिति में सीधे रिम्स या सदर अस्पताल में जांच क्यों नहीं कराई गई? -यह प्रारंभिक जांच थी, जो तत्काल जरूरत के तहत कराई गई। अब कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम के माध्यम से रिम्स या सदर अस्पताल में भी जांच कराई जाएगी, ताकि पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सके। भास्कर एक्सपर्ट – ए कुमार, रिटायर्ड जेल सुपरिटेंडेंट क्या कहता है जेल मैनुअल क्या किसी महिला बंदी का प्रेग्नेंसी टेस्ट बिना उसकी सहमति के कराया जा सकता है? -जेल मैनुअल के अनुसार, जेल सुपरिटेंडेंट को मेडिकल जांच कराने का अधिकार है। मैनुअल में यह स्पष्ट नहीं है कि जांच किस प्रकार की होगी। जांच के दौरान एनएचआरसी का फॉर्म भरना जरूरी है। ऐसे मामलों में जांच कहां कराई जानी चाहिए? -जेल मैनुअल के अनुसार सामान्य बीमारियों के लिए स्थानीय या संबद्ध लैब का उपयोग किया जा सकता है। -शेष पेज 9 पर



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