ब्रेनवॉश कर बनाते थे धर्मांतरण गैंग का प्रचारक:इस्लामिक किताबों में छपता था नाम,पाकिस्तान में बैठे लोगों से होती थी बात, रिमांड में हुए बड़े खुलासे




आगरा धर्मांतरण गैंग के चार आरोपियों की तीन दिन की पुलिस रिमांड में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। गैंग पहले लोगों का ब्रेनवॉश करता था, फिर उन्हीं से दूसरों का धर्म बदलवाने की ट्रेनिंग दिलवाता था। जो टास्क पूरा कर लेता, उसका नाम इस्लामिक साहित्य में छापा जाता था। पुलिस को फंडिंग और नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग भी मिले हैं। सदर की दो बहनों के केस में हुए थे गिरफ्तार
सदर निवासी दो सगी बहनों के धर्मांतरण मामले में पुलिस ने दिल्ली के परवेज अख्तर, जाशिम उर्फ जतिन कपूर, तलमीज उर रहमान और राजस्थान के डीग निवासी मौलाना हसन को गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने चारों को तीन दिन की रिमांड पर भेजा था। रिमांड पूरी होने के बाद बुधवार को पुलिस ने 7 दिन की और रिमांड के लिए अर्जी दी है। ऐसे काम करता था गैंग: पहले मदद, फिर ब्रेनवॉश
डीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि गैंग गली-मोहल्लों में जाकर बीमार और बेरोजगार लोगों को निशाना बनाता था। पहले पानी की बोतल, खाने का सामान बांटकर मदद करते थे। इस दौरान कलीम सिद्दीकी की किताबें साथ रखते थे। जो लोग परेशानी बताते, उन्हें किताब थमा देते और मोबाइल नंबर ले लेते थे।इसके बाद अलग-अलग नंबरों से कॉल कर इस्लाम की खूबियां गिनाते थे। सोशल मीडिया पर धर्म परिवर्तन के वीडियो दिखाकर प्रभावित करते थे। कई बार पैसों का लालच भी दिया जाता था। जतिन कपूर ने खोली गैंग की कार्यशैली
पूछताछ में जाशिम उर्फ जतिन कपूर ने बताया कि पहले उसके धर्म की कमियां निकालकर उसे मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। धर्म बदलने के बाद उसे दूसरों का धर्म बदलवाने की ट्रेनिंग दी गई। टास्क पूरा करने पर उसे आर्थिक मदद मिलती थी। जतिन ने कबूला कि उसने कई युवा लड़के-लड़कियों को बातों में फंसाकर धर्म बदलवाया। इसके बाद इस्लामिक साहित्य की किताबों में उसका नाम छापा गया। किताबों में नाम देखकर नए लोग उससे संपर्क करते थे। वह टैबलेट पर फंडिंग का हिसाब रखता था और पाकिस्तान में बैठे सदस्यों से भी बात करता था। बाटला हाउस-शाहीन बाग में छिपे फंडिंग के सबूत
परवेज अख्तर ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा सेंटर में धर्मांतरण के लेन-देन के रजिस्टर हैं। पकड़े जाने के डर से उसने रजिस्टर शाहीन बाग में छिपा दिए। तलमीज उर रहमान ने कबूला कि फंडिंग का रिकॉर्ड दिल्ली के बाटला हाउस में डॉ. आदिल के परिचित के यहां रखा है। मौलाना हसन ने बताया कि कलीम सिद्दीकी का दामाद अब्दुल रहमान गिरोह का नेटवर्क कश्मीर समेत कई राज्यों तक फैला चुका है। उसने कई लोगों के मोबाइल नंबर भरतपुर में एक रजिस्टर में छिपाकर रखे हैं। कलीम के जेल जाने के बाद बदली कमान
पुलिस के मुताबिक सजा काट रहे कलीम सिद्दीकी के जेल जाने के बाद गिरोह की कमान कई लोगों ने संभाल ली थी। ये लोग अलग-अलग जिलों में जाकर नेटवर्क चला रहे थे। डीसीपी ने बताया कि अब तक 5-6 नए नाम सामने आए हैं। फंडिंग करने वालों की तलाश जारी है।चारों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि 7 दिन की रिमांड में पूरे नेटवर्क का खुलासा हो जाएगा। मामले में एटीएस भी जांच कर रही है



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