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लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी (बीएनए) के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने रंगमंच में एक अनूठा प्रयोग किया है। छात्रों द्वारा तैयार नाटक ‘द साइलेंट एक्सड़ूस’ ने विस्थापन के दर्द को मंच पर जीवंत किया। यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि गहन शोध, अभ्यास और सामूहिक सृजन का परिणाम है। नाटक की अवधारणा पारंपरिक स्क्रिप्ट आधारित प्रस्तुतियों से हटकर थी। शुरुआत में ‘अधान्तर’, ‘विरासत’, ‘मुख्यमंत्री’ और ‘खराशें’ जैसी कृतियों पर विचार हुआ, लेकिन विद्यार्थियों ने ‘डिव्हाइस्ड थिएटर’ पद्धति अपनाने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में कलाकार केवल अभिनय तक सीमित न रहकर शोध, दृश्य निर्माण और कहानी गढ़ने में भी शामिल रहे। घटनाओं को तीन भागों में प्रस्तुत किया नाटक का केंद्रीय विषय ‘विस्थापन’ था। इसे 1947 के भारत विभाजन से लेकर आधुनिक समय तक की घटनाओं को तीन भागों में प्रस्तुत किया गया। पहले भाग में विभाजन के दौरान हुए पलायन का दर्द दर्शाया गया। दूसरे हिस्से में सतलुज नदी पर बांध निर्माण के कारण विस्थापित हुए गांवों की कहानी थी। तीसरे भाग में कश्मीरी पंडितों के पलायन की त्रासदी को मंच पर उतारा गया। शारीरिक अभिव्यक्तियों से दृश्यों को आकार दिया लगभग 30 दिनों तक चले गहन प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास में विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक दस्तावेजों, रिपोर्ट्स और केस स्टडीज का अध्ययन किया। अभिनय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कलाकारों ने इम्प्रोवाइजेशन एक्सरसाइज के माध्यम से दृश्यों की रचना की। छात्रों ने स्वयं स्थितियों की कल्पना कर ब्लॉकिंग्स तैयार कीं और शारीरिक अभिव्यक्तियों से दृश्यों को आकार दिया। इस नाटक की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि इसकी कोई पूर्व-लिखित स्क्रिप्ट नहीं थी। संवाद विद्यार्थियों की शारीरिक भाषा, अभिनय और शोध के आधार पर तैयार किए गए। भाषा को सरल और प्रभावशाली रखा गया, ताकि दृश्य की गति और भावनाएं सीधे दर्शकों तक पहुंच सकें।
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भारतेन्दु नाट्य अकादमी के छात्रों नेपेश किया 'द साइलेंट एक्सड़ूस':विस्थापन पर आधारित नाटक शोध और सामूहिक सृजन का परिणाम















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