रायसेन में वट सावित्री और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग:सुहागिनों ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगी अखंड सौभाग्य की मन्नत; शनि मंदिर में उमड़े श्रद्धालु




रायसेन में शनिवार को वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती का विशेष संयोग बना, जिससे शहरभर में सुबह से ही धार्मिक माहौल रहा। इस दुर्लभ अवसर पर मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुहागिन महिलाओं ने जहां पति की दीर्घायु के लिए वट वृक्ष की पूजा की, वहीं भक्तों ने शनिदेव की आराधना कर कष्टों से मुक्ति की कामना की। शहर के वार्ड-9 स्थित शनि मंदिर परिसर में लगे वट वृक्ष के पास सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उस पर सूत बांधा। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की प्रार्थना के साथ महिलाओं ने व्रत रखा और सावित्री-सत्यवान की कथा भी सुनी। महिलाओं का मानना है कि हिंदू धर्म में इस व्रत के प्रभाव से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। शनि मंदिर में तेल और काले तिल का अर्पण
शनि जयंती के पावन अवसर पर रामलीला मैदान स्थित शनि मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्तों ने भगवान शनिदेव के दर्शन कर उन्हें सरसों का तेल, काले तिल, काले वस्त्र और प्रसाद अर्पित किया। मंदिर परिसर में हवन-पूजन सहित विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए गए। मंदिर समिति के अनुसार, इस विशेष दिन हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर भगवान शनिदेव से सुख-शांति की प्रार्थना की। वर्षों बाद बना शनिवार के दिन यह शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कई वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब शनिवार के ही दिन वट सावित्री अमावस्या और शनि जयंती एक साथ पड़ी हैं। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस संयोग को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इसी विशेष महत्व के कारण शहर के सभी प्रमुख मंदिरों और पूजा स्थलों पर सामान्य दिनों की तुलना में भक्तों की काफी अधिक भीड़ देखी गई। देखिए और भी तस्वीरें…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *