रेलयात्रा के दौरान टैगोर ने अपनी कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिन्हें मिला नोबेल पुरस्कार




रवींद्रनाथ टैगोर के जीवन-दर्शन और रचनात्मक अवदानों की स्मृति को याद करते हुए शब्दकार की गोष्ठी मोरहाबादी में हुई। कथाकार पंकज मित्र ने टैगोर के समग्र रचनाकर्म पर बताया कि उनका मातृहीन बचपन अकेलेपन की पीड़ा से भरा हुआ था। पारंपरिक शिक्षा में उनका विश्वास नहीं था इसलिए उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्वभारती विवि की स्थापना की जहां आज भी प्रकृति के सानिध्य में कक्षाएं ली जाती हैं। स्त्री शिक्षा व चेतना के विकास पर हमेशा जोर दिया व हमेशा उग्र राष्ट्रवाद के खिलाफ रहे। वे मानते थे कि राष्ट्रवाद मानवता से ऊपर उठ जाए तो विनाश की ओर ले जाता है। साहित्यकार प्रमोद झा ने कहा कि टैगोर के विश्वभारती में वर्जनाओं की अवधारणा नहीं है। एक रेलयात्र के दौरान उन्होंने अपनी कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया था जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपने पुरोधाओं को ज्यादा से ज्यादा जानना चाहिए शब्दकार की अध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि हमें अपने पुरोधाओं को ज्यादा से ज़्यादा जानना चाहिए, ताकि खुद को समृद्ध कर सके। संचालन अनामिका प्रिया व धन्यवाद ज्ञापन जयमाला ने किया। सचिव राजीव थेपड़ा ने टैगोर के गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। अंशुमिता, निर्मला, अर्पणा, रेणुबाला, अमरेश, खुशबू, उमा अनुश्री सरकार उपस्थित रहे।



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