सीएम से मुलाकात, 3 दिन बाद कांग्रेसी नेता का मर्डर:क्या विधायक के इशारे पर हुई थी हत्या या कोई और ही था मास्टरमाइंड?




मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी दमोह के चर्चित देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड की, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। मामला एक बड़े नेता की हत्या से जुड़ा था, जिसमें विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई प्रभावशाली नाम सामने आए। सनसनी इसलिए भी मची क्योंकि हत्या से तीन दिन पहले ही देवेंद्र ने मुख्यमंत्री से मिलकर जान का खतरा बताया था। सुरक्षा का भरोसा मिला, लेकिन 3 दिन बाद उनकी हत्या हो गई। आरोप सत्ता समर्थक विधायक के पति पर लगे। क्या था पूरा मामला आगे पढ़िए… 15 मार्च 2019 का दिन। सुबह के करीब साढ़े दस बजे थे। दमोह जिले के हटा में पथरिया रोड पर स्थित डामर-क्रेसर प्लांट में रोज की तरह काम शुरू होने वाला था। मशीनें शांत थीं, मजदूर धीरे-धीरे पहुंच रहे थे और प्लांट मालिक देवेंद्र चौरसिया अपने परिवार के लोगों के साथ ऑफिस खोलने की तैयारी कर रहे थे। अचानक प्लांट में घुसी गाड़ियां देवेंद्र चौरसिया प्लांट के बाहर खड़े थे। उनका बेटा सोमेश और परिवार के दूसरे लोग आसपास ही थे। तभी मेन गेट से एक के बाद एक कई गाड़ियां अंदर दाखिल हुईं। एक काली डस्टर, एक क्रेटा, एक महिंद्रा TUV और एक लाल खुली जीप…और पीछे-पीछे कई बाइक्स। गाड़ियों से करीब 25 से 30 लोग उतरे। किसी के हाथ में लाठी थी, किसी के पास लोहे की रॉड। कुछ बेसबॉल बैट जैसे हथियार लिए हुए थे। हमलावर बोले- जिंदा नहीं छोड़ेंगे प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक युवक ने देवेंद्र की कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी। कहा गया- ‘तूने पाला बदल लिया, हमारा वर्चस्व खत्म कर दिया… आज तुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे’ इसके बाद हमला शुरू हो गया। लोहे की रॉड… लाठियां… फावड़े और डंडे बरसाने लगे। देवेंद्र चौरसिया पर लगातार वार किए जाने लगे। उनके परिवार के लोग बचाने दौड़े, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी धमका दिया। बोले-’जो बाहर आया, उसका भी यही हाल होगा…’ पूरा क्रेसर प्लांट चीखों से गूंज रहा था। पिता को बचाने दौड़ा बेटा… फिर दोनों गिर पड़े जब बेटा सोमेश अपने पिता को बचाने के लिए आगे बढ़ा, तो हमलावर उस पर भी टूट पड़े। उस पर भी लोहे की रॉड और डंडों से हमला किया गया। कुछ ही सेकंड में बाप-बेटे दोनों जमीन पर पड़े थे।
हमलावर मौके से फरार हो गए। पीछे छूट गया खून से सना प्लांट… और दहशत में खड़े परिवार के लोग। देवेंद्र चौरसिया की सांसें चल रही थीं। परिवार उन्हें पहले हटा अस्पताल लेकर पहुंचा। हालत गंभीर होने पर दमोह रेफर किया गया और फिर जबलपुर भेजा गया। आखिर कौन थे देवेंद्र चौरसिया? देवेंद्र चौरसिया सिर्फ कारोबारी नहीं थे। वे दमोह की राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाते थे। 2019 लोकसभा चुनाव में वे बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके थे। चुनाव हारने के बाद भी इलाके की राजनीति में सक्रिय थे। ठेकेदारी और क्रेसर कारोबार में भी उनका बड़ा नेटवर्क था। इसलिए देवेंद्र की हत्या के पीछे राजनीतिक कारण था या उनके कारोबार से जुड़ी वजह थी, यह साफ नहीं था। हत्या से 3 दिन पहले सीएम से मुलाकात 12 मार्च 2019 को भोपाल में देवेंद्र चौरसिया ने कांग्रेस जॉइन की थी। उस समय मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री थे। बताया जाता है कि कांग्रेस में शामिल होने के दौरान देवेंद्र ने अपनी जान को खतरा बताया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से सुरक्षा की मांग भी की थी। लेकिन इसके ठीक तीन दिन बाद उनकी हत्या हो गई। यहीं से यह मामला सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि राजनीतिक साजिश का बन गया। शक की सुई सत्ता से जुड़े लोगों पर हत्या के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। घटना के वक्त मौजूद घायल बेटे सोमेश और परिवार के अन्य लोगों के बयान लिए गए। बयान में कई नाम सामने आए।
सोमेश ने पुलिस को बताया कि हमलावर गाड़ियों और बाइकों से आए थे। उसने गोविंद सिंह, गोलू सिंह, चंदू सिंह, इंद्रपाल पटेल, लोकेश पटेल, अमजद पठान और श्रीराम शर्मा सहित कई नाम बताए।
28 तक जा पहुंची आरोपियों की संख्या पुलिस ने शुरुआत में 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। हालांकि जांच आगे बढ़ी तो आरोपियों की संख्या बढ़कर 28 तक पहुंच गई। हत्या, बलवा और मारपीट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए और पुलिस उनकी तलाश में जुट गई। लेकिन कई सवाल अभी बाकी थे… क्या यह सिर्फ पुरानी रंजिश थी?
या राजनीति और वर्चस्व की लड़ाई?
आखिर देवेंद्र चौरसिया की हत्या की साजिश किसने रची?
हमले के पीछे असली वजह क्या थी?
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