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एक ओर शिक्षा विभाग के अफसर अधूरे शौचालय की सीसी जारी करने के लिए घूस ले रहे हैं। दूसरी ओर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शौचालय न होने से ‘स्वच्छ भारत’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के दावों की पोल खोलने वाली शर्मनाक तस्वीरें सामने आई है। प्रदेश के 788 सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए टॉयलेट बनाने हेतु 2 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट जारी किया गया था, लेकिन कई जगह स्कूल प्रभारियों ने यह राशि फर्नीचर और भवनों की रंगाई-पुताई पर खर्च कर दी। नतीजतन छात्राओं को अपनी सहेलियों या महिला शिक्षकों की पहरेदारी में खुले मैदान या दीवार की ओट में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। लापरवाही हुई तो जांच होगी
प्रदेश के स्कूलों में शौचालय निर्माण में यदि कहीं लापरवाही हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी। -राव उदय प्रताप, शिक्षा मंत्री, मप्र तस्वीर…क्या ऐसे जर्जर टॉयलेट उपयोगी हैं सिर्फ 2 टूटी दीवार, जिनकी ओट में शौच जा रही छात्राएं यहां के प्राथमिक विद्यालय में पिछले पांच वर्षों से शौचालय नहीं है। 26 छात्राएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। शौचालय के नाम पर केवल दो टूटी दीवारें खड़ी हैं, जिनकी ओट में छात्राएं सहेलियों को बाहर खड़ा कर शौच के लिए जाती हैं। स्कूल को दो बार 20-20 हजार रुपए मिले लेकिन अब तक शौचालय नहीं बन सका। राजगढ़ (ब्यावरा) शिक्षक करती हैं निगरानी, तब शौच जाती हैं छात्राएं
शाप्रावि इंद्रा कॉलोनी का भवन जर्जर होने के कारण 135 बच्चों को पीजी कॉलेज परिसर के एक कमरे में शिफ्ट किया गया है। यहां टॉयलेट नहीं है। छात्राओं को खुले में शौच के लिए जाने पर महिला शिक्षिकाओं को बाहर खड़े होकर पहरा देना पड़ता है। अशोकनगर (पछारी) इमरजेंसी में शौच करने लिए छुट्टी लेकर घर जा रहीं बेटियां
यहां के माध्यमिक विद्यालय में 23 छात्राएं पढ़ती हैं, लेकिन शौचालय नहीं है। आपात स्थिति में छात्राओं और महिला शिक्षकों को स्कूल छोड़कर घर जाना पड़ता है। कई छात्राएं असुविधा के कारण आधी छुट्टी में ही घर लौट जाती हैं। स्कूलों में अधूरे शौचालयों की सीसी जारी करने मांगे 17 लाख, धार का डीपीसी 1 लाख की घूस लेते पकड़ा मध्य प्रदेश के धार जिले में सरकारी स्कूलों में 122 टॉयलेट बनने से पूर्व ही उनका कंप्लीट सर्टिफकेट (सीसी) जारी करने के एवज में एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए डीपीसी प्रदीप कुमार खरे (57) को लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा है। इंदौर लोकायुक्त ने सोमवार को कार्यवाहक सहायक इंजीनियर दिलीप साधव (41) की शिकायत के बाद ट्रैप किया गया। लोकायुक्त के प्रभारी निरीक्षक सचिन पटेरिया ने बताया कि डीपीसी ने 3.42 करोड़ रुपए के शौचालय निर्माण की फाइल पर सीसी जारी करने 17 लाख मांगे थे।
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टॉयलेट में भ्रष्टाचार:मप्र के 788 स्कूलों में टॉयलेट नहीं, खुले मैदान में शौच जा रहीं बेटियां












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