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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने श्योपुर नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में जिला अदालत का फैसला पलट दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका समय पर ही दाखिल की गई थी, इसलिए अब इस पर दोबारा सुनवाई होगी। यह पूरा विवाद 2020 में नगरपालिका कानून में हुए बदलावों के कारण पैदा हुआ था। नए नियमों के मुताबिक अब अध्यक्ष का चुनाव जनता के बजाय पार्षद करते हैं, लेकिन कानूनी पेचीदगियों की वजह से यह साफ नहीं हो पा रहा था कि हारने वाला उम्मीदवार कितने दिनों के भीतर कोर्ट में शिकायत कर सकता है। मामले से जुड़ी बड़ी बातें जुलाई 2022 में श्योपुर नगर परिषद के चुनाव हुए थे। 5 अगस्त 2022 को हुई पहली बैठक में रेनू गर्ग को अध्यक्ष चुना गया। इसके खिलाफ 23 अगस्त को याचिका दायर की गई, जिसे जिला अदालत ने 1 फरवरी 2024 को यह कहकर खारिज कर दिया था कि इसे दाखिल करने में देरी हुई है। कोर्ट ने सुलझाई उलझन हाईकोर्ट ने कहा कि जब पार्षदों की पहली बैठक में ही अध्यक्ष चुन लिया जाता है, तो याचिका लगाने का समय भी उसी दिन से गिना जाएगा। इस हिसाब से 5 अगस्त के चुनाव के खिलाफ 23 अगस्त को दी गई अर्जी बिल्कुल सही समय पर थी। विपक्षी पक्ष पर 1 लाख का जुर्माना कोर्ट ने विपक्षी पक्ष पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर कानूनी अड़चनें पैदा कीं ताकि मामला खिंचता रहे। इसे अदालती समय की बर्बादी मानते हुए उन पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसमें से 50 हजार रुपए याचिकाकर्ता को मिलेंगे और 50 हजार रुपए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा होंगे। जब तक यह जुर्माना नहीं भरा जाता, विपक्षी पक्ष केस की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकेगा। जल्द फैसले के निर्देश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि इस चुनाव याचिका पर तेजी से काम किया जाए और नवंबर 2026 तक हर हाल में अंतिम फैसला सुनाया जाए। साथ ही, सरकार के प्रमुख सचिव को इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट देने को भी कहा गया है।
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हाईकोर्ट ने श्योपुर जिला न्यायाधीश का आदेश रद्द किया:नगरपालिका अध्यक्ष चुनाव याचिका को सुनवाई योग्य माना, नवंबर 2026 तक फैसला देने कहा















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