RTE विवाद के बीच निजी स्कूलों का बड़ा फैसला:18 मई से फिर देंगे एडमिशन;कहा- गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देंगे




छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश को लेकर बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है। संगठन ने घोषणा की है कि 18 मई से प्रदेश के सभी निजी स्कूल फिर से RTE के तहत प्रवेश देना शुरू करेंगे। हालांकि, प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने और एंट्री क्लास बदलने के विरोध में चल रहा असहयोग आंदोलन जारी रहेगा। निजी स्कूल संचालकों ने 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन की अगली कड़ी में 4 अप्रैल को प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर इस साल RTE के तहत प्रवेश नहीं देने का फैसला लिया गया था। संगठन का आरोप है कि लगातार मांगों की अनदेखी की जा रही है। संगठन के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी हालिया आंकड़ों में 33 में से 29 जिलों में 50% से अधिक सीटें खाली रहना आंदोलन की सफलता को दर्शाता है। हाईकोर्ट में लंबित है मामला संगठन ने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका क्रमांक WPC 4988/2025 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 19 सितंबर 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग को छह महीने के भीतर संगठन की रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। संगठन का आरोप है कि आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेसी को हाईकोर्ट से नोटिस जारी हुआ है। एंट्री क्लास बदलने पर भी विरोध संगठन ने कहा कि आंदोलन अब केवल प्रतिपूर्ति राशि तक सीमित नहीं है। इस वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग ने कई स्कूलों में RTE की एंट्री क्लास बदलकर पहली कक्षा कर दी है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि इससे वंचित परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। संगठन की ओर से दायर याचिका क्रमांक 414/2026 अभी हाईकोर्ट में लंबित है। उनका दावा है कि पहले हर साल करीब 65 हजार विद्यार्थियों को प्रवेश मिलता था, जबकि इस बार रिक्त सीटों की संख्या करीब 22 हजार रह गई है। “गरीब बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होने देंगे” प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में तय किया गया कि आंदोलन दोनों मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा, लेकिन किसी भी वंचित बच्चे की शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। इसी के तहत 18 मई से दोबारा प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है। संगठन ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि शासकीय स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले खर्च की राशि सार्वजनिक की जाए। संगठन का कहना है कि नियमों के अनुसार निजी स्कूलों को भी उतनी ही प्रतिपूर्ति राशि मिलनी चाहिए।



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