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सीधी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मोहनिया निवासी दिव्यांग बाबूलाल कोल को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। इस कारण उनकी राशन और पेंशन बंद हो गई है। बाबूलाल को अब अपने बूढ़े माता-पिता का भरण-पोषण करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को सीधी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने बाबूलाल कोल के घर जाकर उनकी समस्या सुनी। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। बाबूलाल ने बताया कि एक माह पहले उन्होंने कलेक्टर जनसुनवाई में अधिकारियों से अपनी राशन और पेंशन बहाल करने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा था कि वे जीवित हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बाबूलाल के अनुसार, जब उनकी पेंशन बंद हुई, तो उन्होंने गांव के एक कंप्यूटर संचालक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि सरकारी दस्तावेजों में उनकी मृत्यु दर्ज हो चुकी है, जिसके कारण उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। उन्होंने इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी से भी शिकायत की थी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। कांग्रेस के युवा नेता ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री ने भी बाबूलाल के परिवार से मुलाकात की और उन्हें राशन सामग्री उपलब्ध कराई। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बाबूलाल को तत्काल सरकारी रिकॉर्ड में जीवित घोषित किया जाए। यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रविवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से मोहन यादव सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने कहा कि किसी जीवित व्यक्ति को कागजों में मृत घोषित करना अस्वीकार्य है। इस बीच, सोमवार को जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह सोलंकी ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि यह मामला सोशल मीडिया के जरिए उनके संज्ञान में आया है और यदि लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सीधी में दिव्यांग कागजों में मृत घोषित:राशन और पेंशन मिलना हुई बंद, मदद करने पहुंचे कांग्रेस नेता















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