रिहायशी क्षेत्र में चल रहे गोदाम के खिलाफ याचिका:राज्य सरकार सहित अन्य को नोटिस; कहा- लगातार हो रहे हैं अग्नि हादसे




जबलपुर में फायर सेफ्टी नियमों का पालन न होने एवं रहवासी एरिया में गोदाम और व्यावसायिक भवन बिना प्रमाण पत्र के संचालित होने को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। सोमवार को मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार, नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब समर वेकेशन के बाद होगी। जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे, अध्यक्ष नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि शहर के रहवासी एरिया में गोदाम, व्यावसायिक भवन, दुकानें और फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जिनमें फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई प्रतिष्ठान बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं और सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की जा रही है। याचिका में कहा गया कि भीषण गर्मी के बीच यह स्थिति अग्नि दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रही है। बरगी की घटना से नहीं लिया सबक याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कहा कि इसी प्रकार की लापरवाही के कारण बरगी जैसी घटना हुई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने उससे कोई सीख नहीं ली। उन्होंने बताया कि नगर निगम सीमा के भीतर बड़ी संख्या में गोदाम संचालित हो रहे हैं, जहां फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार कोई भी गोदाम शहर के भीतर नहीं होना चाहिए। इस संबंध में याचिकाकर्ताओं की ओर से लगातार मांग की जाती रही, लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी का एनओसी प्रमाण पत्र भी अनिवार्य है, जो कई प्रतिष्ठानों के पास नहीं है। इसके बावजूद दुकानें और गोदाम संचालित किए जा रहे हैं। शहर में कुछ स्थान ऐसे भी हैं, जहां गोदाम संकरी गलियों में चल रहे हैं। वहां आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तक नहीं पहुंच सकतीं। इसके बावजूद प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी याचिका में यह भी कहा है कि जबलपुर के समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित हो रहा है कि नगर निगम और प्रशासन फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रहे प्रतिष्ठानों और भवनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। न तो नोटिस दिए जा रहे हैं और न ही अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं। जबकि शहर में पहले भी एक हॉस्पिटल में बड़ी जनहानि हो चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन नगर निगम अधिनियम और भूमि विकास नियमों के विपरीत फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी कर रहा है। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी मामले पर सोमवार को जस्टिस एमएस भट्टी और बीपी शर्मा की वेकेशन बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित अन्य पक्षों को जवाब प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।



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