प्रिंस खान गिरोह का हथियार सप्लायर गिरफ्तार:पिस्टल-रिवॉल्वर और कारतूस बरामद, कांग्रेस का रह चुका है पूर्व जिला महासचिव




धनबाद में पुलिस ने फरार चल रहे प्रिंस खान गिरोह से जुड़े एक कथित सफेदपोश सहयोगी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गोविंदपुर निवासी मंजूर आलम उर्फ सोनू दर्जी के रूप में हुई है। वह कांग्रेस का पूर्व जिला महासचिव रह चुका है। बरवाअड्डा पुलिस ने उसके पास से दो पिस्टल और जिंदा गोलियां भी बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी गिरोह के लिए रंगदारी से वसूले गए पैसों को जमीन में निवेश कराने का काम करता था। पूछताछ में उसने कई अहम खुलासे किए हैं, जिससे पुलिस की जांच और तेज हो गई है। धनबाद-बंगाल में करोड़ों की संपत्ति का निवेश जांच में सामने आया है कि बीसीसीएल ठेकेदारों, आउटसोर्सिंग कंपनियों के संचालकों और स्थानीय व्यवसायियों से डराकर वसूली गई रकम को धनबाद और पश्चिम बंगाल में जमीन खरीदने में लगाया जाता था। आरोपी सिर्फ जमीन खरीद और एग्रीमेंट कराने में शामिल नहीं था। वह गिरोह के अपराधियों को हथियार उपलब्ध कराने में भी उसकी भूमिका सामने आई है। पुलिस को उसके पास से जमीन से जुड़े दस्तावेज और निवेश के प्रमाण भी मिले हैं। पूछताछ में मंजूर ने स्वीकार किया है कि गिरोह के जरिए करोड़ों रुपए का निवेश विभिन्न स्थानों पर किया गया है। पुलिस दबाव के बाद हुआ था भूमिगत पुलिस सूत्रों के अनुसार, जैसे ही धनबाद में प्रिंस खान गिरोह के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई, मंजूर आलम भूमिगत हो गया था। लंबे समय तक उसकी लोकेशन का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। बताया जाता है कि उसने कम समय में ही काफी संपत्ति अर्जित कर ली थी। हाल के दिनों में उसने महंगी गाड़ी खरीदी। अलीशान घर भी बनवाया था। राजनीतिक गतिविधियों में भी वह सक्रिय था। जिला परिषद चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुका है। उसके आवास पर कई राजनीतिक हस्तियों का आना-जाना भी चर्चा में रहा है। आर्म्स एक्ट के कई मामले पहले से दर्ज पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मंजूर आलम के खिलाफ पहले से ही चोरी, डकैती और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। गोविंदपुर और बलियापुर थाना में उसके खिलाफ दो-दो मामले दर्ज हैं, जबकि बरवाअड्डा थाना में एक केस दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अब उसे रिमांड पर लेकर और पूछताछ करने की तैयारी में है। इसके लिए अदालत में आवेदन भी दिया जाएगा, ताकि गिरोह के नेटवर्क और संपत्ति के पूरे खेल का खुलासा हो सके।



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