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छत्तीसगढ़ के धमतरी में प्रशासन ने एक निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाया। प्रशासनिक अमले और पुलिस बल की मौजूदगी में यह बेदखली की कार्रवाई की गई। निर्माणकर्ता ने दावा किया है कि उन्हें 40 साल पहले प्रशासन की तरफ से ही पट्टा दिया गया था। यह कार्रवाई सोमवार दोपहर जिले के कुरूद तहसील के ग्राम बगौद में की गई। प्रशासन ने इसे शासकीय आबादी भूमि पर अवैध अतिक्रमण बताते हुए ध्वस्त किया। हालांकि, पीड़ित पक्ष ने इस कार्रवाई को गलत और एकतरफा बताया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे इस कार्रवाई के दौरान बजरंग चौक पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए थे, जिसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर तहसीलदार सूरज बंछोर, थाना प्रभारी अवध कुमार साहू, सरपंच दशोदा कमलेश साहू सहित राजस्व अमला और पुलिस बल तैनात था। पीड़ित अभय राम साहू और हेमचंद साहू ने इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। निर्माणकर्ताओं ने बताया कि वे इस जमीन पर पिछले 40 वर्षों से काबिज हैं। निजी जमीन समझकर खरीदा, रजिस्ट्री भी उनका कहना है कि, उन्होंने इसे निजी जमीन समझकर खरीदा था और उनके पास इसकी रजिस्ट्री भी है। जमीन पर पहले से पत्थर की नींव भी डली हुई थी। जब उन्हें पता चला कि यह आबादी भूमि है, तो शासन की तरफ से साल 2017 में उन्हें मुख्यमंत्री आबादी पट्टा भी जारी किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में कुछ ग्रामीणों के आपत्ति दर्ज कराने पर तहसीलदार कोर्ट ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर आपत्तियों को खारिज कर उनके पक्ष में फैसला सुनाया था और पट्टे को वैध माना था। एसडीएम कोर्ट के आदेश पर अचानक हुई कार्रवाई निर्माणकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दोबारा स्थगन होने के बाद एसडीएम कोर्ट के आदेश पर अचानक यह कार्रवाई कर दी गई। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया। इस कार्रवाई से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई को न्यायसंगत नहीं बताया। गैर-आवासीय इस्तेमाल के लिए निर्माण चल रहा था- तहसीलदार इस मामले में तहसीलदार सूरज बंछोर ने बताया कि यह कार्रवाई न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी के आदेश के परिपालन में की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बजरंग चौक स्थित संबंधित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में आबादी के तौर पर दर्ज है। इस भूमि पर पीड़ित पक्ष द्वारा गैर-आवासीय उपयोग के लिए निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस विशेष निर्माण के लिए उनके पास कोई वैध पट्टा नहीं था,जिसके चलते इसे अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में मानकर हटाने की कार्रवाई की गई है।
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धमतरी में निर्माणाधीन कॉम्प्लेक्स पर चला बुलडोजर:निर्माणकर्ता का दावा- 40 साल से काबिज, मुख्यमंत्री आबादी पट्टा भी दिया गया था














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