जांजगीर-चांपा के हसदेव नदी में रेत खदान का टेंडर निरस्त:हाईकोर्ट बोला-बिना फाइनल सर्वे रिपोर्ट के नहीं हो सकती नीलामी, ग्राम-पंचायत की याचिका पर फैसला




छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रेत खदानों की नीलामी को लेकर अहम फैसले में जांजगीर-चांपा जिले के हसदेव नदीं पर रेत खुदाई का टेंडर निरस्त कर दिया है। ग्राम पंचायत हथनेवरा में रेत खुदाई की अनुमति पर डिवीजन बेंच ने कहा कि, बिना फाइनल जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी डीएसआर के रेत खदानों की नीलामी नहीं की जा सकती। सिर्फ ड्राफ्ट रिपोर्ट को वेबसाइट पर अपलोड कर देना काफी नहीं है, कानूनन इस पर जनता से आपत्तियां मांगना और फिर कलेक्टर से मंजूर कराना जरूरी है। दरअसल, जांजगीर-चांपा जिले में प्रशासन ने बगैर जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के रेत खुदाई के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी। जिसमें पांच साल पुरानी रिपोर्ट को आधार बनाया गया। इसके तहत 30 मार्च 2026 को रेत नीलामी के टेंडर जारी कर दिया गया और बोली लगाने वाले ठेकेदार को फाइनल कर दिया गया। टेंडर की प्रक्रिया को पंचायत ने दी चुनौती ग्राम पंचायत हथनेवरा के सरपंच ने टेंडर की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, इसमें 30 मार्च 2026 को जारी रेत नीलामी के टेंडर को निरस्त करने की मांग की गई। पंचायत का कहना था कि जिले में कोई वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट मौजूद नहीं है। पुरानी रिपोर्ट की 5 साल की अवधि खत्म हो चुकी है, इसलिए बिना नई मंजूर रिपोर्ट के टेंडर जारी करना गलत है। राज्य शासन का जवाब-रोक लगाने से राजस्व का नुकसान वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि, साल 2025 की रिपोर्ट तैयार कर ली गई थी, इसे 27 नवंबर 2025 को इंटरनेट पर भी डाला गया था। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सफल बोली लगाने वालों के नाम तय हो चुके हैं। ऐसे में अब रोक लगाने से सरकारी राजस्व का नुकसान होगा। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि सरकार ने जिस रिपोर्ट का हवाला दिया, वह सिर्फ एक ड्राफ्ट रिपोर्ट थी, उसे सक्षम अधिकारी ने अंतिम रूप से मंजूर नहीं किया था। दोबारा टेंडर और अवैध खुदाई पर कार्रवाई की छूट हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि, बिना फाइनल डीएसआर के रेत खनन की इजाजत नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने इस आधार पर हथनेवरा में रेत खनन का टेंडर रद्द कर दिया है। हालांकि, राज्य सरकार को छूट दी है कि वह नियम के मुताबिक नई रिपोर्ट मंजूर कराकर दोबारा टेंडर जारी कर सकती है। इसके साथ ही इलाके में अवैध रेत उत्खनन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए भी प्रशासन को पूरी आजादी दी गई है।



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