![]()
राजधानी रांची स्मार्ट सिटी बनने की दौड़ में है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। मिशन चौक और मेन रोड-सर्जना चौक की ये तस्वीरें विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं प्लास्टिक की ओट बनाकर तो कहीं खुले में लघुशंका इन पुलिसकर्मियों की मजबूरी है। रांची को राजधानी बने 25 साल बीत गए, लेकिन ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए एक अदद शौचालय तक नहीं बन पाया। महिला पुलिसकर्मियों की स्थिति और भी असहज है, जिन्हें आसपास के मॉल और दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। सरकार और निगम शहर को चमकाने में जुटे हैं, पर सड़कों पर घंटों खड़े इन जवानों की पीड़ा शायद किसी की प्राथमिकता में नहीं है।
Source link
इन्हें भी शर्म आती है… कहां जाएं ये ट्रैफिक पुलिसकर्मी









Leave a Reply