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मप्र सरकार ने नई तबादला नीति में उन जिलों में महिला अफसरों की पोस्टिंग को प्राथमिकता देने का प्रावधान किया है, जहां लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के 9 जिलों में लिंगानुपात कम दर्ज किया गया है। 20 मई को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने तबादला नीति-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत 1 से 15 जून तक राज्य और जिला स्तर पर तबादले किए जा सकेंगे। नीति में महिला कर्मचारियों और पति-पत्नी को एक ही जिले में पोस्टिंग देने को प्राथमिकता दी गई है। ऐसे तबादलों को विभागीय अधिकतम सीमा से बाहर रखा गया है। एमपी के 9 जिलों में लिंगानुपात 900 से कम है
लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को दर्शाता है और इसे लैंगिक समानता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। 1000 से कम अनुपात महिलाओं के प्रति भेदभाव या प्रतिकूल सामाजिक परिस्थितियों की ओर संकेत करता है। प्रदेश के ऐसे जिलों में ग्वालियर-चंबल के 5, बुंदेलखंड के 2 और मध्य क्षेत्र के 2 जिले शामिल हैं। अनुसूचित क्षेत्रों में तबादलों के लिए सख्त नियम
सबसे पहले इन क्षेत्रों के सभी रिक्त पद भरे जाएंगे, उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों में तबादले होंगे। यहां कम से कम 3 साल की सेवा अनिवार्य रहेगी और तबादले वरिष्ठता के आधार पर किए जाएंगे। किसी कर्मचारी को तब तक रिलीव नहीं किया जाएगा, जब तक उसकी जगह नया अधिकारी पदभार नहीं संभाल ले। विशेष मामलों में विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री समन्वय को भेजा जा सकेगा। हालांकि, अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में तबादले पर यह शर्त लागू नहीं होगी। तबादले की 6 प्रमुख शर्तें ऊपर बताए डेटा को ऐसे समझिए
तबादला नीति के तहत स्वैच्छिक और प्रशासनिक आधार पर विभागवार तबादलों की सीमा तय की गई है। जिन विभागों में 200 तक कर्मचारी हैं, वहां 20% तक तबादले किए जा सकेंगे। 201 से 1000 कर्मचारियों वाले विभागों में यह सीमा 15% रहेगी।1001 से 2000 कर्मचारियों वाले विभागों में 10% और 2001 से अधिक कर्मचारियों वाले विभागों में 5% तक तबादले किए जा सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी विभाग में 1200 कर्मचारी हैं, तो तय फॉर्मूले (160+ 1200-1000X10/100) के अनुसार 180 कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे। इसी तरह 300 कर्मचारियों वाले विभाग में (40+300-200X15/100 ) 55 तबादले संभव होंगे। पिछले साल के मुकाबले इसबार होंगे ज्यादा तबादले
सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, इस साल पिछले वर्षों की तुलना में अधिक तबादले होने की संभावना है। पति-पत्नी की एक साथ पदस्थापना, गंभीर बीमारी और स्वैच्छिक तबादलों को तय सीमा से बाहर रखने के कारण तबादलों की संख्या बढ़ सकती है। प्रशासनिक आधार के अलावा तबादले के 5 और क्राइटेरिया ‘ए प्लस’ कैटेगरी और डेडलाइन
कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से विभागों को भेजे गए ‘ए प्लस’ श्रेणी के तबादला आवेदन इस नीति के दायरे से बाहर रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों का निराकरण 31 मई तक किया जाए।
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तबादलों के जरिए लिंगानुपात सुधारेगी एमपी सरकार:ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड के 9 जिलों में महिला अफसर; यहां लड़कों के मुकाबले लड़कियां कम













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