मोहन सरकार की नई तबादला नीति जारी:जीएडी ने कहा-टारगेट एचीव न करने वाले अफसर-कर्मचारी तीन साल से पहले भी हटाए जा सकेंगे




मध्यप्रदेश सरकार ने तबादला नीति 2026 शुक्रवार को जारी कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार की नई नीति के अनुसार अब उन अधिकारी-कर्मचारियों के तबादले प्रशासनिक आधार पर प्राथमिकता से किए जाएंगे, जो सरकार के तय लक्ष्य पूरे करने में असफल रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने बुधवार को कैबिनेट की मंजूरी के बाद आदेश जारी करते हुए विभागों को 1 जून से 15 जून 2026 तक तबादले करने की अनुमति दी है। नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों को एक ही जिले में तीन वर्ष पूरे होने पर जिले से बाहर स्थानांतरित किया जा सकेगा। वहीं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों का भी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय पूरा होने पर तबादला किया जा सकेगा। तीन साल की अवधि पूरी होना अनिवार्य शर्त नहीं सरकार ने यह भी साफ किया है कि तीन साल की अवधि पूरी होना अनिवार्य शर्त नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी पिछले वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं कर पाया है, तो उसका तबादला तय अवधि से पहले भी किया जा सकेगा। प्रशासनिक आधार पर ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका प्रदर्शन कमजोर रहा है। जीएडी ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण और नियामक प्रकृति वाले विभागों को छोड़कर केवल तीन वर्ष की अवधि को तबादले का आधार न बनाया जाए। न्यायालय के आदेश, गंभीर शिकायत, रिक्त पदों की पूर्ति, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति से वापसी जैसे मामलों में भी विभाग तय प्रक्रिया के तहत तबादले कर सकेंगे। हालांकि रिक्त पदों की पूर्ति के लिए श्रृंखलाबद्ध तबादलों पर रोक रहेगी। पदस्थापना प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार होगी नई नीति के तहत स्वयं के खर्च पर या परस्पर स्थानांतरण के आवेदन ऑनलाइन अथवा कार्यालय प्रमुख द्वारा सत्यापित आवेदन के रूप में स्वीकार किए जाएंगे। प्रशासनिक और स्वेच्छिक तबादलों के आदेश अलग-अलग जारी किए जाएंगे। शिक्षा विभाग के लिए विशेष प्रावधान करते हुए कहा गया है कि जिन कर्मचारियों ने निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं किए हैं, उनके तबादलों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष या उससे कम समय शेष है, उनका तबादला सामान्यतः नहीं किया जाएगा। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, लेकिन पदस्थापना प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार तय होगी। स्वेच्छा से स्थानांतरण संभव होगा नीति में गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। कैंसर, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर स्थानांतरण किया जा सकेगा। वहीं 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारियों का सामान्यतः तबादला नहीं किया जाएगा, लेकिन उनकी स्वेच्छा पर स्थानांतरण संभव होगा। अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को उनके गृह जिले में पदस्थ किए जाने का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को गृह तहसील और विकासखंड छोड़कर गृह जिले में पदस्थ किया जा सकेगा। कर्मचारी नेताओं को चार वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी सरकार ने अतिशेष स्टाफ के युक्तियुक्तकरण के निर्देश भी दिए हैं। तकनीकी शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों में विषयवार निर्धारित संख्या से अधिक शिक्षकों को अन्यत्र भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया में कनिष्ठतम शिक्षक को प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जाएगा, हालांकि महिला, दिव्यांग और एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को राहत दी गई है। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को दो कार्यकाल यानी चार वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी। वहीं वित्तीय अनियमितता, गबन या सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तत्काल संबंधित पदों से हटाने का प्रावधान भी नई नीति में किया गया है।



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