लंबित केस पर नौकरी नहीं रुकेगी:हाईकोर्ट का अहम फैसला, नियुक्ति नहीं रोकी जा सकती




इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल आपराधिक मुकदमे के लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी की सरकारी नौकरी नहीं रोकी जा सकती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि अभ्यर्थी किशोर घोषित हो चुका हो या पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगा दी हो, तो ऐसे मामलों को नियुक्ति रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह ने अंबेडकरनगर निवासी सुशील त्रिपाठी की याचिका पर दिया। सुशील का चयन कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) में एमटीएस पद पर हुआ था। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस सत्यापन में दो पुराने मामलों का जिक्र आने पर विभाग ने उनकी नियुक्ति रोक दी थी। याची सुशील त्रिपाठी ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने दोनों मामलों की जानकारी विभाग को पहले ही दे दी थी। इनमें से एक मामला 2015 का था, जिसमें किशोर न्याय बोर्ड ने उन्हें नाबालिग घोषित किया था। दूसरा मामला 2020 का था, जिसमें पुलिस जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि किशोरावस्था की घटनाओं का असर किसी व्यक्ति के पूरे भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि पुलिस किसी मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा चुकी है, तो केवल अदालत में अंतिम आदेश लंबित होने के कारण किसी का करियर लंबे समय तक बाधित नहीं किया जा सकता। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि किसी मामले में अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है, तो संबंधित विभाग उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।



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