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नर्मदापुरम जिले के पर्यटन स्थल मढ़ई के पास बसे जंगल में बसें स्थित पापड़पानी भीषण जलसंकट गहरा गया है। यहां के 40 परिवारों के करीब 200 लोग गड्ढे का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में पेयजल का एकमात्र साधन हैंडपंप पिछले 8 दिनों से बंद पड़ा है। मंगरिया पंचायत के अंतर्गत आने वाले पापड़पानी गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नल-जल योजना नहीं पहुंची। जबकि PHE विभाग द्वारा मंगरिया पंचायत के सभी पांच गांवों में नल-जल योजना से पेयजल सप्लाई की जा रही है, लेकिन पापड़पानी के लोग अब भी योजना के लाभ से वंचित हैं। जिसमें गांव के ग्रामीण शुद्ध पानी से प्यासे है। हेैडपंप बंद हो जाने से मजबूरी में ग्रामीण गांव से 200 मीटर दूर स्थित एक खुले गड्ढों का गंदा पानी पी रहे हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को दैनिक भास्कर रिपोर्टर पेयजल की स्थिति जानने ग्राउंड जीरो पर पापड़पानी गांव पहुंचा। एक घर के बाहर खड़े ग्रामीण मोटू से पेयजल की स्थिति के बारे में पूछा, उन्होंने कहा गांव में पानी का संकट है। एकमात्र हैंडपंप से पूर्ति नहीं हो पाती है। फिलहाल में हैडपंप खराब होने से 8 दिन से बंद है। जिस कारण झिरिया से पानी लाना पड़ रहा है। जब हम उस झिरिया के पास पहुंचे, जो बगैर मुंडेर की थी। 3 फ़ीट नीचे उतरकर लकड़ी पर खड़े होकर तीन युवक पानी भर रहे थे। गड्ढे में मटमैला पानी था। जिसमें काई जमी थी और मृत, जीवित मेंढक, जीव जंतु पड़े थे। मौजूद गांव के तीनों युवक स्टील के बर्तन, प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर पी रहे थे। आदिवासी मोटू ने प्रशासन से मांग की कि अबतक हमारे यहां नल जल, जलजीवन मिशन के तहत काम नहीं हुआ है। पानी की समस्या का स्थाई निवारण करवा दीजिए तपती धूप में सुबह 11 बजे सिर पर प्लास्टिक का डब्बा रख जा रही सरिताबाई ने कहा कि गांव में पानी को तरस रहे है, झिरिया से पानी लाते है। बिना मुंडेर का होने से जान का खतरा जिस गड्ढे से ग्रामीण पानी भरकर लाते है, वो उसमें मुंडेर नहीं है। पानी भरने के लिए 3 फ़ीट नीचे उतरना पड़ता है। जिसमें गिरने की संभावना बनी रहती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक सुबह और शाम लोगों की भीड़ लगी रहती है। बच्चें भी इसी तरह पानी भरने आते है। जिससे उनकी जान पर खतरा मंडरा रहा है। जलसंकट को लेकर ग्रामीणों की राय आदिवासी ग्रामीण महिला संगीता बाई ने बताया पानी की समस्या है, काफी दिक्कत होती है। जो हैंडपंप है वो कभी चलता, कभी नहीं चलता है। जिस कारण 200मीटर दूर झिरिया से रोजाना पानी लाते है। गंदा पानी को छानकर पीना मजबूरी है। हमारी समस्या को समाधान करना चाहिए। खराब होने पर सुधरवा देते है हैंडपंप ग्राम पंचायत सचिव भगवानदास रघुवंशी का कहना है कि पापड़पानी में पेयजल के लिए एक हैंडपंप है, जब भी बंद होता या खराबी आती हुआ, पीएचई से सुधरवा देते है। 2किमी दूर रैनीपानी में नलजल योजना से पानी सप्लाई होता है। फिलहाल में पापड़पानी नलजल योजना नहीं डाली गई है। एक नजर पंचायत की ओर ग्राम मंगरिया पंचायत में 7 गांव है। जिसमें रैनीपानी, मंगरिया, पापड़पानी टप्पा, पाठई, खापा एवं रातामाटी और खरपाबढ़, उरदोन। जिसकी जनसंख्या करीब 2600 है। जिसमें 500 परिवार आदिवासी, 14 परिवार एसी वर्ग और 3 पिछड़ा वर्ग जाति से है। पापड़पनी में 40 आदिवासी परिवार के 200 लोग है। गांव में नलजल नहीं हैं। 6 गांवों में नलजल योजना से सप्लाई होता है।
एक्सपर्ट की राय दूषित पानी से बीमारी का खतरा पेट रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रविंद्र गंगराड़े ने बताया अगर नदी का रुका है या गड्ढे में जमा है, गंदा है तो वो पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। टाइफाइड, पीलिया की संभावना हो सकती है। ऐसी स्थिति में पानी उबालकर, छानकर ही पिये। वो शुद्ध श्रेणी में आ जाता है।
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गड्ढे का दूषित पानी पीने को मजबूर 200 आदिवासी परिवार:नर्मदापुरम में अफसरों की अनदेखी से नहीं पहुंची नल-जल योजना















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