सोटे बाबा हनुमान मंदिर जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा:कानपुर में शनिवार की महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, लगाए जयकारे




शनिवार की शाम होते ही कानपुर साउथ स्थित प्रसिद्ध ‘केसोटे बाबा हनुमान मंदिर’ (सोटे बाबा) में एक अलग ही अलौकिक नजारा देखने को मिला। मौका था शनिवार की साप्ताहिक भव्य महाआरती का, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर प्रांगण पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर ‘बजरंग बली’ और ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। फूलों और सतरंगी लाइटों से सजा गर्भगृह महाआरती के विशेष अवसर पर मंदिर के मुख्य गर्भगृह को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं और सतरंगी लाइटों की रोशनी से पूरा दरबार जगमगा रहा था। शनिवार को भगवान हनुमान जी का बेहद अलौकिक और भव्य श्रृंगार किया गया। बजरंग बली के ठीक नीचे फूलों और चंदन से ‘राम’ नाम अंकित था, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। राम दरबार और शिवलिंग की भी हुई विशेष आरती हनुमान जी के दर्शनों के बाद मंदिर के पुजारी नितिन शुक्ला ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ महाआरती की शुरुआत की। सबसे पहले धूप-कपूर फैलाकर पूरे वातावरण को शुद्ध और सुगंधित किया गया। इसके बाद मुख्य प्रतिमा के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थापित भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के ‘राम दरबार’ की आरती उतारी गई। वहीं, पास ही स्थित शिवलिंग पर भी विशेष आरती की गई, जिसके ऊपर दीवार पर ‘भगवान शिव जी की आरती’ का बोर्ड लगा हुआ था। घंटों और शंखनाद की गूंज से थिरके भक्त आरती के दौरान माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। जैसे ही मुख्य पुजारी नितिन शुक्ला ने हाथ में जलते हुए दीयों का स्टैंड (आरती) उठाया, पूरा मंदिर घंटों, शंख और नगाड़ों की आवाज से गूंज उठा। प्रांगण में मौजूद भक्त पूरी ऊर्जा के साथ मंदिर के बड़े-बड़े घंटों को बजाते नजर आए। पार्श्व में बज रहे इन वाद्य यंत्रों ने वहां मौजूद हर शख्स को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। आंखें बंद, हाथ जुड़े…भक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु इस महाआरती में शामिल होने के लिए पुरुष, महिलाएं और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी थी। पैर रखने तक की जगह नहीं थी, फिर भी अनुशासन और भक्ति का अद्भुत नजारा दिखा। आरती के समय सभी श्रद्धालुओं ने आंखें बंद कर रखी थीं और हाथ जोड़कर बेहद भावुक होकर सुर में सुर मिला रहे थे। आरती संपन्न होने के बाद पुजारी जी ने माइक से मंत्रोच्चारण किया और सभी को शांतिपूर्वक प्रसाद ग्रहण करने को कहा। कुल मिलाकर शनिवार की यह संध्या आरती भक्तों के लिए एक जीवंत और पवित्र आध्यात्मिक अनुभव दे गई।



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