बरेली का पोस्टमार्टम हाउस एक बार फिर बदइंतजामी और लापरवाही को लेकर सवालों में है। यहां डीप फ्रीजर लंबे समय से खराब पड़ा है, जिसकी वजह से भीषण गर्मी में शव तेजी से सड़ रहे हैं। हालत यह है कि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े होना तक मुश्किल हो गया है।
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20 मई को यहां 17-18 शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे थे, लेकिन दोपहर 3 बजे तक कोई डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। कई परिवार 19 मई की रात से शवों के साथ पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काटते रहे। परिजन भूखे-प्यासे पोस्टमार्टम का इंतजार करते रहे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा।
इसके बाद परिजनों ने सीधे डीएम और सीएमओ को फोन कर शिकायत की। इसके बाद दोपहर में आनन-फानन में डॉक्टर भेजा गया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी। दैनिक भास्कर से बातचीत में परिजनों ने एम्बुलेंस के नाम पर वसूली, शव न दिखाने और घंटों परेशान करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल पढ़िए…..

बरेली के पोस्टमार्टम हाउस में समय से पोस्टमार्टम नहीं किया जा रहा। परिजन भूखे-प्यासे पोस्टमार्टम का इंतजार करते रहे।
अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए…
पोस्टमार्टम के लिए भटकते रहे परिजन, हंगामे के बाद पहुंचे डॉक्टर
बरेली के पोस्टमार्टम हाउस में रोजाना करीब 5-6 डेडबॉडी आती हैं। वहीं, कभी-कभार इनकी संख्या 12-15 भी हो जाती है। डॉक्टर रोजाना 5-6 डेड बॉडी का पोस्टमार्टम करते हैं। 20 मई को पोस्टमार्टम हाउस में कुल 17-18 शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे।
इनमें 6-7 शव एक-दो दिन पुराने थे, जिनके परिजन मंगलवार से पोस्टमार्टम कराने के लिए भटक रहे थे। वहीं, कुछ शव बुधवार सुबह लाए गए थे। भीषण गर्मी और बड़ी संख्या में शव होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग का कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचा।
सुबह से लेकर दोपहर 3 बजे तक पोस्टमार्टम हाउस में डॉक्टरों का इंतजार होता रहा। अपनों को खो चुके परिजन घंटों तक परेशान होते रहे। उनका सब्र टूट गया और उन्होंने परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
परिजनों ने डीएम और सीएमओ को फोन कर पूरी स्थिति बताई, तब प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद दोपहर 3 बजे के बाद एक डॉक्टर को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया, जिसके बाद पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

बरेली के पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम कराने के लिए भटकते रहे परिजन।
अब पढ़िए पीड़ित क्या बोले..
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़े लोग सिर्फ देरी से परेशान नहीं थे, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और अव्यवस्था से भी बेहद नाराज थे। परिजनों का आरोप था कि उन्हें घंटों तक परेशान किया गया, कोई जिम्मेदार अधिकारी समय पर नहीं पहुंचा और हर स्तर पर उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

रणबीर सिंह ने बताया कि एम्बुलेंस के नाम पर हमसे जबरन 1 हजार रुपए वसूल लिए गए।
साले की मौत के बाद एंबुलेंस के नाम पर वसूले 1 हजार: रणबीर सिंह
टनकपुर का रहने वाला विक्की (28) बरेली के करेली इलाके में किराए पर रहकर मजदूरी करता था। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे उसके जीजा रणबीर सिंह ने बताया कि विक्की एक खेत में पानी लगा रहा था। इसी दौरान वह अचानक खेत में गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
रणबीर का आरोप है कि खेत मालिक ने उसे अस्पताल पहुंचाने या मदद करने के बजाय शव को खेत से बाहर रखवा दिया और सिर्फ विक्की की मां को सूचना दी। उस समय परिवार पूर्णागिरि दर्शन के लिए गया हुआ था। सूचना मिलने के बाद सभी रात करीब 1 बजे वापस लौटे।
रणबीर ने बताया कि पुलिस और स्वास्थ्य कर्मियों ने शव को जिला अस्पताल में रखे रखा। जब शव को पोस्टमार्टम हाउस लाने की बात हुई, तो एम्बुलेंस के नाम पर हमसे जबरन 1 हजार रुपए वसूल लिए गए। बाद में सीएमओ को शिकायत और लिखित आवेदन देने के बाद ही शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया।
शव कल से रखा हुआ है, लेकिन अब तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ। परिवार सुबह से भूखे-प्यासे पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

जितेंद्र ने बताया कि सुबह से परिवार पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
हादसे में भाई को खोया, सुबह से भूखे-प्यासे भटक रहे: जितेंद्र
बरेली में मजदूरी करने वाले राजपाल सिंह की मंगलवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई। उनके चचेरे भाई जितेंद्र ने बताया कि राजपाल किसी दावत में गए थे और रात करीब 9 बजे बाइक से अकेले घर लौट रहे थे। इसी दौरान धमकाड़ा स्थित धौनी कट के पास उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई। परिवार में उनके दो भाई हैं।
जितेंद्र ने बताया कि मंगलवार रात करीब 12 बजे ही परिवार जिला अस्पताल पहुंच गया था। उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से भाई का चेहरा दिखाने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें शव तक नहीं देखने दिया गया। इसके बाद परिवार थाने पहुंचा और किसी तरह पंचनामा की प्रक्रिया पूरी कर सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा।
जितेंद्र ने कहा- सुबह से परिवार पोस्टमार्टम हाउस के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। भीषण गर्मी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ परिजन परेशान हैं। घर से लगातार फोन आ रहे हैं कि शव कब मिलेगा, लेकिन डॉक्टरों के न पहुंचने से पोस्टमार्टम शुरू ही नहीं हो सका।

नीलेश ने कहा- पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और गरीब परिवारों को घंटों परेशान किया जा रहा है।
डॉक्टर और प्रशासन मिलकर हमें बेवकूफ बना रहे हैं: नीलेश
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे नीलेश ने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुबह से यहां 13-14 शव पड़े हुए हैं, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। परिजन लगातार डीएम, सीएमओ और अन्य अधिकारियों को फोन कर रहे हैं, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही।
नीलेश ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और गरीब परिवारों को घंटों परेशान किया जा रहा है। उनका कहना था कि डॉक्टरों और प्रशासन की लापरवाही की वजह से लोग भीषण गर्मी में अपनों के शवों के साथ इंतजार करने को मजबूर हैं।

बादल सिंह ने कहा- दोपहर 1 बजे से परिवार पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ा हूं, लेकिन अब तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा।
सिपाही की मौत, दोपहर 1 बजे तक नहीं मिली लाश: बादल सिंह
बरेली के रहने वाले बादल सिंह भी पोस्टमार्टम हाउस की बदइंतजामी से परेशान नजर आए। उन्होंने बताया कि मेरे साले सूरज कुमार (37) उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल थे। इस समय उनकी तैनाती बरेली पुलिस लाइन में थी। सूरज मूल रूप से कासगंज के रहने वाले थे और यह उनकी दूसरी पोस्टिंग थी।
बादल सिंह ने बताया कि मंगलवार को अचानक सूरज कुमार को दिल का दौरा पड़ा। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिवार में उनकी पत्नी, एक भाई, तीन बहनें और तीन छोटे बच्चे हैं।
दोपहर 1 बजे से परिवार पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ा हूं, लेकिन अब तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। जब पुलिस विभाग के जवान के परिवार को भी इस तरह परेशान होना पड़ रहा है, तो आम लोगों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने कहा- हमारे पास डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है।
सीएमओ का गैर-जिम्मेदाराना तर्क और जमीनी हकीकत
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने अपनी कमियों को छुपाते हुए कहा कि हमारे पास डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है। दोपहर 2 बजे तक डॉक्टरों की ड्यूटी जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) में होती है। ओपीडी खत्म करने के बाद ही डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस के लिए रवाना होते हैं।
सीएमओ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डॉक्टरों की टीम तैनात कर सकते
हकीकत यह है कि जिला अस्पताल की ओपीडी आधिकारिक तौर पर दोपहर 1:30 बजे तक ही चलती है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, यदि पोस्टमार्टम हाउस में सामान्य से ज्यादा शव पहुंचते हैं, तो सीएमओ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त डॉक्टरों की टीम तैनात कर सकते हैं। बुधवार को पोस्टमार्टम हाउस में 17-18 शव मौजूद थे, इसके बावजूद समय पर अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गई।
भीषण गर्मी में परिजन रात से ही अपने अपनों के शवों के साथ पोस्टमार्टम हाउस के बाहर इंतजार करते रहे। कई लोग भूखे-प्यासे घंटों बैठे रहे, लेकिन डॉक्टरों के देर से पहुंचने के कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इससे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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