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चलती कथा में राजनीतिक रैली जैसा माहौल, भड़के कथावाचक चलती कथा में माहौल किसी राजनीतिक रैली जैसा हो गया तो कथावाचक गुस्सा हो गए। उन्होंने मंच से ही श्रद्धालुओं को खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने कहा- आप लोग कथा में बैठना सीखिए। आप किसी नौटंकी में नहीं बैठे हैं। आप लोगों ने तो हद कर दी, सीमाएं तोड़ दीं, मर्यादाएं तोड़ दीं।
यह वाकया दतिया के खमेरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान हुआ। दरअसल, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा में पहुंचे थे। उनके आने से कथा में कुछ अव्यवस्थाएं हो गईं। क्षेत्र के लोग नरोत्तम मिश्रा को देखकर खड़े हो गए, उनसे हाथ मिलाने लगे और उनके समर्थन में नारे भी लगे।
फिर नरोत्तम मिश्रा मंच पर आए तो उनके साथ समर्थकों की भीड़ भी मौजूद रही। उन्होंने मंच पर कथा कर रहे स्वामी भास्करानंद जी महाराज का स्वागत किया और उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे मंच से नीचे उतर गए।
इसके बाद कथावाचक ने व्यासपीठ से कहा- आप लोग एक राजनेता के आने से इतने अधिक अव्यवस्थित हो जाते हैं, मैंने ऐसा पहली बार देखा है। ऐसा आचरण और ऐसा व्यवहार कथा के अनुरूप नहीं है। फिर उन्होंने कहा- आपके पास सरकार के ऊपर भी सरकार बैठी है।
स्वामी भास्करानंद जी महाराज जब यह बात कह रहे थे, तब नरोत्तम मिश्रा पंडाल से निकल रहे थे। संभव है कि कथावाचक की कही यह खरी बात उनके कानों तक भी पहुंची हो। अब लोग इस वाकये को लेकर चटकारे ले रहे हैं और इसे नेता जी की फजीहत से जोड़कर देख रहे हैं।

दतिया में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा में पहुंचे तो कुछ देर के लिए अव्यवस्थाएं हो गई।
महंगा पड़ा कारों के काफिले वाला प्रदर्शना, दो नेता पर एक्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील नहीं मानने वाले भाजपा के दो नेताओं पर कार्रवाई हो गई है। एक का पद चला गया, जबकि दूसरे के अधिकार छीन लिए गए हैं।
भिंड में भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव ने पीएम मोदी की अपील को दरकिनार करते हुए अपनी झांकी दिखाई थी। वे सैकड़ों वाहनों का काफिला लेकर सड़कों पर उतरे। इस पर भाजपा ने सख्ती दिखाई और उनकी नियुक्ति के महज 18 दिन के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया।
इसी तरह, पाठ्य पुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह भी चर्चा में रहे। पदभार ग्रहण करने के लिए वे करीब 700 वाहनों का काफिला लेकर उज्जैन से भोपाल पहुंचे थे। इसके बाद निगम के अध्यक्ष के रूप में उनके अधिकार छीन लिए गए और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी थमाया गया।
हालांकि, इन कार्रवाइयों के बावजूद कुछ नेता अब भी नहीं मान रहे। सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल का मामला इसका ताजा उदाहरण है। वे भले ही दिखावे के लिए ई-रिक्शा में बैठे नजर आए, लेकिन उनके पीछे करीब 200 गाड़ियों का काफिला चलता रहा।
वहीं छतरपुर में प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव का मामला भी कुछ ऐसा ही रहा, जहां सादगी की अपील के उलट तस्वीरें सामने आईं। वे भी लंबे-चौड़े काफिले के साथ सड़कों पर उतरीं, जिससे जाम जैसे हालात भी बने।
दूसरी ओर, कई नेता पीएम मोदी की अपील का पालन करते नजर आए। सांसद से लेकर विधायक और मंत्री- कोई साइकिल पर, कोई ई-स्कूटी पर, कोई ई-रिक्शा में, तो कोई बस और ट्रेन से सफर करता दिखा। हालांकि, इस दौरान सोशल मीडिया पर ‘रीलबाजी’ भी जमकर देखने को मिली।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जब संदेश सादगी और बचत का है, तो क्या यह केवल दिखावे तक सीमित रह जाएगा, या फिर आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जैसी कुछ मामलों में देखने को मिली है।

मोदी की अपील के बावजूद कारों का काफिला निकाला, दो नेताओं पर कार्रवाई की गई।
मंत्री की चुनौती, सीएम भी आ जाए तो भी मैं पीछे नहीं हटूंगा मध्य प्रदेश की सियासत में एक बयान ने अचानक हलचल पैदा कर दी है। राज्य मंत्री नारायण सिंह पवार का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भी आ जाएं तो वे खड़े रहेंगे। पहले उनका इस्तीफा लिया जाए, उसके बाद ही आगे बात होगी।
मंत्री के इस बयान को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चुनौती के रूप में देखा जाने लगा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दरअसल, पूरा मामला राजगढ़ जिले में एक निजी कंपनी के प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसके लिए कई किसानों से जमीन ली गई है। इसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
इसी मामले में किसानों की एक पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें मंत्री नारायण सिंह पवार भी शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन छीनने नहीं दी जाएगी। इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सौंधिया भी किसानों के समर्थन में उतर चुके हैं।
हालांकि, बयान पर बवाल बढ़ने के बाद मंत्री ने सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। साथ ही स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के प्रति संवेदनशील हैं और हमेशा उनके हित में ही निर्णय लेते हैं।

राजगढ़ में किसानों के समर्थन में उतरे मंत्री नारायण सिंह पवार ने इस्तीफे की धमकी दे दी।
इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), राधावल्लभ मिश्रा (दतिया), मनीष सोनी (राजगढ़), पवन दीक्षित (भिंड), राजेश चौरसिया (छतरपुर), सावन राजपूत (खंडवा), सचिन राठौर (बड़वानी), रईस सिद्दिकी (बुरहानपुर), राजकुमार द्विवेदी (सिंगरौली), ब्यावरा (मुकेश सेन)
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हमारे मध्य प्रदेश को यूं ही ‘अजब-गजब’ नहीं कहा जाता। एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक अधिकारी चड्डी-बनियान पहनकर दफ्तर में ड्यूटी करते नजर आए। इसके बाद किसी ने उनका वीडियो बना लिया, जो तेजी से वायरल हो गया। पूरी खबर पढ़ें














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