ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में जिलेभर के मेडिकल बंद:दवा कारोबारी बोले- भारी डिस्काउंट और होम डिलीवरी पर रोक लगे, पैदल मार्च निकाला




बैतूल में ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दवाओं की कथित अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के विरोध में बुधवार को जिलेभर के मेडिकल स्टोर बंद रहे। इस एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल में 800 से अधिक मेडिकल दुकानों ने हिस्सा लिया, जिनमें सरकारी जन औषधि केंद्र भी शामिल रहे। एआईओसीडी और राज्य संगठन के आह्वान पर हुआ आंदोलन यह आंदोलन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और मध्यप्रदेश राज्य केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर किया गया। बैतूल जिला औषधि विक्रेता संघ के नेतृत्व में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के दवा कारोबारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। पैदल मार्च निकालकर जताया विरोध दवा विक्रेताओं ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत अपील का पालन करते हुए निजी वाहनों का उपयोग नहीं किया। उन्होंने रामकृष्ण बगिया से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद बड़ी संख्या में दवा कारोबारी रैली में शामिल हुए और ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट पहुंचकर दवा विक्रेताओं ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि बिना किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की बिक्री, फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के घर-घर दवा वितरण और अत्यधिक छूट मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के लाइसेंसधारी मेडिकल संचालकों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो रहा है। ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठाए सवाल ज्ञापन में दवा विक्रेताओं ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी विभिन्न कंपनियां वर्षों से दवाओं की ऑनलाइन बिक्री कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2018 की अधिसूचना जीएसआर 817(ई) और कोविड काल में जारी जीएसआर 220(ई) को वापस लेने की मांग की। दवा कारोबारियों का आरोप है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्विक कॉमर्स कंपनियां अनियंत्रित होम डिलीवरी कर रही हैं। भारी डिस्काउंट और होम डिलीवरी पर रोक की मांग दवा कारोबारियों ने मांग की कि बिना वैध और सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा दी जा रही अत्यधिक छूट और प्रिडेटरी प्राइसिंग नीति पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।



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