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राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य में जारी अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मध्यप्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि कार्रवाई केवल ट्रक ड्राइवरों और हेल्परों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अवैध खनन के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क और असली सरगनाओं तक पहुंचना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि सैकड़ों एफआईआर दर्ज होने के बावजूद माफिया किंगपिन्स अब तक गिरफ्त से बाहर हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की है। 14 मई के आदेश के तहत राजस्थान और मध्यप्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए थे। मध्यप्रदेश की ओर से परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने राजस्थान के पांच प्रमुख सचिवों की उपस्थिति भी दर्ज की। सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी, सॉलिसिटर जनरल और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अब 26 मई को विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी, जब तक उन्हें विशेष रूप से न बुलाया जाए। एमपी सरकार ने बताया-वाहनों की निगरानी बढ़ाई गई मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि जंगल क्षेत्रों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों की निगरानी बढ़ाई गई है। कई वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई है और अवैध खनन रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश ने निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम और हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना भी कोर्ट के सामने रखी। हालांकि कोर्ट ने कहा कि केवल निचले स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। अवैध खनन में शामिल पूरे नेटवर्क पर सख्ती जरूरी है। कोर्ट ने मुरैना-धौलपुर बॉर्डर पर बने पुल की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से भी विस्तृत हलफनामा मांगा, क्योंकि पुल के आसपास लगातार अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। चंबल सेंचुरी में अवैध खनन पर्यावरणीय खतरा सुप्रीम कोर्ट ने चंबल सेंचुरी में अवैध खनन को गंभीर पर्यावरणीय खतरा बताया। कोर्ट पहले भी रेत माफियाओं को नए डाकू करार दे चुका है। अदालत ने फॉरेस्ट स्टाफ की कमी पर चिंता जताते हुए भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही गांव वालों के लिए वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। राजस्थान के प्रयासों की हुई सराहना सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना की। राजस्थान सरकार ने कोर्ट में विस्तृत कॉम्प्लाइंस एफिडेविट पेश करते हुए CCTV इंस्टॉलेशन, GPS ट्रैकिंग, जॉइंट पेट्रोलिंग, FIR, गिरफ्तारियां और करीब 65 करोड़ रुपए की फंडिंग की जानकारी दी। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान का विकसित किया जा रहा मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।
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'सिर्फ ट्रक ड्राइवर नहीं, खनन के सरगनाओं को पकड़ो':चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 26 मई को आएगा विस्तृत आदेश














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