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राजधानी में चर्चित ट्विशा शर्मा सुसाइड केस को लेकर अब संत समाज की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने दहेज प्रथा पर करारा प्रहार करते हुए इसे बेटियों की मौत का बड़ा कारण बताया है। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ट्विशा शर्मा, पलक और दीपिका जैसे तीन मामलों ने पूरे समाज को झकझोर दिया है, जिनमें दहेज की लालच प्रमुख वजह बनकर सामने आई है। स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा “माता-पिता अपनी बेटी को यह सोचकर ससुराल भेजते हैं कि उन्होंने पर्याप्त दिया है, लेकिन दहेज के लालच की कोई सीमा नहीं होती। जब यह लालच बढ़ता है, तो अंततः बेटी की जिंदगी ही खत्म हो जाती है। मौत से पहले हर दिन घुटती है पीड़िता उन्होंने कहा कि जो महिलाएं आत्महत्या जैसा कदम उठाती हैं, वे एक दिन में यह निर्णय नहीं लेतीं, बल्कि लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहती हैं। “जो इंसान मौत को गले लगाता है, वह उससे पहले हर दिन मर रहा होता है, हर दिन घुट रहा होता है। मौत के बाद भी चरित्र हनन का आरोप स्वामी हर्षानंद गिरि ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में पीड़िता की मौत के बाद ससुराल पक्ष उसके चरित्र, परवरिश और परिवार पर सवाल उठाकर बदनाम करने की कोशिश करता है। उन्होंने इसे “दूसरी सजा” बताया, जो मृतक के परिवार को झेलनी पड़ती है। समाज में गलत संदेश, महिलाओं को नहीं डरना चाहिए स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा कि समाज में लंबे समय से महिलाओं के खिलाफ ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं है। वहीं पुरुष समाज की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ मामलों के बाद पूरे समाज में गलत धारणा बना दी जाती है। न्याय के लिए परिवार को लड़नी पड़ती है दूसरी लड़ाई
स्वामी हर्षानंद गिरि ने कहा कि सबसे दुखद पहलू यह है कि बेटी को खोने के बाद भी माता-पिता को न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। “उन्हें अपनी बेटी को निर्दोष साबित करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए एक और संघर्ष करना पड़ता है।
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ट्विशा केस पर बोलीं हर्षा रिछारिया:मौत से पहले रोज मरती हैं बेटियां, न्याय के लिए माता-पिता को दूसरी जंग लड़नी पड़ती है















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