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इंदिरा सागर परियोजना के तहत 16 मई को मुख्य नहर में पानी छोड़ दिया गया है, जो अगले आठ से दस दिनों में बड़वानी पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, मुख्य नहर से खेतों तक पानी ले जाने वाली माइनर और सब-माइनर नहरों की स्थिति चिंताजनक है। बीते एक दशक से नियमित सफाई और मरम्मत न होने के कारण नहरों में गाद जमा है और कई स्थानों पर झाड़ियां उग आई हैं, जिससे पानी की बर्बादी का खतरा बढ़ गया है। एक दशक से नहीं हुई नहरों की सफाई जानकारी के अनुसार, सजवानी, रेहगुन, सुराना और तलवाड़ा बुजुर्ग सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसान नहरों की टूट-फूट को लेकर परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि नहरें संकरी हो चुकी हैं और दीवारों में दरारें हैं, जिससे खेतों तक पहुंचने से पहले ही पानी का रिसाव हो जाएगा। भारतीय किसान संघ के जिला सदस्य धर्मेंद्र राठौर ने कहा कि विभाग हर साल केवल आश्वासन देता है, जिससे सिंचाई प्रभावित होती है। बजट की कमी और प्रशासनिक देरी से बाधा विभागीय अधिकारियों ने बताया कि नहरों के सुधार के लिए शासन को 2 करोड़ 25 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। इंदिरा सागर परियोजना के असिस्टेंट इंजीनियर डीके गोरी ने बताया कि विभाग में मुख्य अभियंता की नियुक्ति न होने के कारण फाइलें अटकी हुई थीं। बजट मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। पानी आने से पहले सुधार की चुनौती विभाग का दावा है कि नियुक्ति और तकनीकी प्रक्रिया जल्द पूरी कर काम शुरू कराया जाएगा। हालांकि, मुख्य नहर में पानी छोड़े जाने के बाद किसानों में इस बात को लेकर संशय है कि क्या टेंडर प्रक्रिया और सफाई का काम समय पर पूरा हो पाएगा। किसानों को डर है कि यदि समय पर सुधार नहीं हुआ, तो इस सीजन में भी उनकी फसलों को पर्याप्त पानी नहीं मिल सकेगा।
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बड़वानी में इंदिरा सागर सिंचाई नहरें बदहाल:एक दशक से नहीं हुई सफाई; मरम्मत के अभाव में नहरों में उगी झाड़ियां















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