21 दिन से फॉरेंसिक लैब में अटकी फाइल, सीआईडी जांच की रफ्तार थमी




झारखंड पुलिस महकमे और सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले ट्रेजरी घोटाले की जांच पर सिस्टम की सुस्ती का ग्रहण लग गया है। इस मामले की परतें खोलने के लिए गठित गठित सीआईडी की एसआईटी की जांच की रफ्तार बेहद धीमी पड़ गई है। इस फर्जीवाड़े के वैज्ञानिक सबूत उगलवाने की मुहिम पिछले 21 दिनों से सरकारी लैब की फाइलों में अटकी हुई है। दरअसल, एसआईटी ने बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज तीन बड़े वित्तीय घोटालों को टेकओवर करते हुए नए सिरे से केस दर्ज किया था। शुरुआती कार्रवाई में तेजी दिखाते हुए एसआईटी ने बोकारो और हजारीबाग के एसपी ऑफिस में दबिश दी थी। वहां से उन कंप्यूटरों के हार्ड डिस्क को जब्त किया था, जिनका इस्तेमाल पुलिसकर्मियों और स्टाफ के वेतन निकासी के बिल बनाने के लिए किया जाता था। एसआईटी ने 25 अप्रैल को इन हार्ड डिस्क को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था। मगर अब तक फॉरेंसिक डेटा एनालिसिस रिपोर्ट नहीं आई है। इस अहम वैज्ञानिक रिपोर्ट के अटकने के कारण एसआईटी की जांच की कड़ियां आगे नहीं बढ़ पा रही हैं और पूरी जांच सुस्त पड़ गई है। हजारीबाग एसपी दफ्तर के 3 मास्टरमाइंड
शंभू कुमार : लेखा शाखा में लंबे समय से कार्यरत, जिसने सबसे अधिक 31 करोड़ की फर्जी निकासी करवाई। रजनीश कुमार सिंह: हजारीबाग एसपी कार्यालय में कार्यरत सिपाही, जो फर्जी वेतन बिल बनाने का मुख्य कारीगर था। धीरेंद्र कुमार सिंह: सिपाही, जिसने रजनीश के साथ मिलकर हजारीबाग ट्रेजरी को चपत लगाई और मुख्य आरोपी है। बोकारो एसपी दफ्तर से गिरफ्तार 4 मोहरे कौशल कुमार पांडेय: इस पूरे नेक्सस का मुख्य आरोपी, जिसने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का ताना-बाना बुना। सतीश कुमार उर्फ सतीश कुमार सिंह: गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) का जवान, जो बोकारो एसपी कार्यालय में लंबे समय से जमे रहकर इस खेल में शामिल था। काजल मंडल: लेखा शाखा में ही तैनात सिपाही, इस हेरफेर में सक्रिय रूप से शामिल था। अशोक कुमार भंडारी: एएसआई, जो लेखा शाखा के हर फर्जीवाड़े से वाकिफ था। अबतक 11 गिरफ्तार, 7 मास्टरमाइंड अगले हफ्ते से रिमांड पर होंगे: अब तक की कार्रवाई में दोनों जिलों के एसपी ऑफिस में सक्रिय नेक्सस के 7 मुख्य आरोपियों सहित कुल 11 आरोपी सलाखों के पीछे हैं। इस महाघोटाले के तार कितने गहरे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एएसआई, सिपाही और होमगार्ड के जवान ही मुख्य सूत्रधार निकले हैं। एसआईटी को इस मामले में जांच के दौरान जानकारी मिली है कि फर्जी तरीके से राशि निकासी के बाद बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई। अगले सप्ताह एसआईटी मुख्य आरोपियों को रिमांड पर लेगी। एसआईटी के सूत्रों के मुताबिक फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट इस पूरे केस की रीढ़ की हड्डी है। चूंकि आरोपियों ने बड़ी चालाकी से कंप्यूटर से सभी फर्जी बिलों के निशान मिटा दिए हैं, इसलिए अब सारा दारोमदार फॉरेंसिक जांच पर टिका है। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स इन जब्त हार्ड डिस्क से डिलीट किए जा चुके डेटा को रिकवर करेंगे। डेटा रिकवर होने के बाद ही एसआईटी को यह पक्का सबूत मिल सकेगा कि दोनों जिलों के एसपी कार्यालय में बैठकर आरोपियों ने वास्तव में किन-किन फर्जी लोगों के नाम पर सैलरी बिल जेनरेट किए थे और उनके एवज में कुल कितनी अवैध सरकारी राशि की निकासी कर सरकार को चूना लगाया गया।



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