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शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र स्थित ग्राम हाजीनगर में आज (शनिवार) एक अनोखा आयोजन हुआ। यहां 60 वर्षीय कल्याण पाल (कल्लू) ने जीवित रहते हुए अपने सामने ही अंतिम गंगा पूजन, कर्मकांड और मृत्यु भोज की तर्ज पर भंडारे का आयोजन कराया। इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया। जानकारी के अनुसार, आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल प्रयागराज गए थे। वहां उन्होंने अपने नाम से कर्मकांड कराया और अस्थि विसर्जन की परंपरा के अनुरूप गंगा स्नान भी किया। इसके उपरांत वे अपने पैतृक गांव हाजीनगर लौट आए। एक दिन पहले रामधुन पाठ भी करवाया
कल्याण पाल ने शुक्रवार को गांव में 24 घंटे का सीताराम रामधुन पाठ भी आयोजित कराया। शनिवार को धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दोपहर लगभग 4 बजे से एक बड़े भंडारे का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूर्णतः मृत्यु भोज की तर्ज पर था, लेकिन कल्याण पाल के जीवित होने के कारण ग्रामीण इसे ‘जिंदा भोज’ कह रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस भंडारे में आसपास के कई गांवों से लगभग 6 से 7 हजार लोगों ने भाग लिया। आयोजन स्थल पर लोगों के भोजन, बैठने और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। वायरल हुए निमंत्रण कार्ड पर लिखा था: ‘अपना अपने सामने अंतिम गंगा पूजन, भंडारा’। इसके साथ ही एक शायरी भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही थी: ‘मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।’ पिता के इकलौते पुत्र हैं, विवाह नहीं हुआ
जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय कल्याण पाल अपने पिता के इकलौते पुत्र हैं। उनका विवाह नहीं हुआ है। परिवार में उनके पीछे कोई निकट संबंधी या जिम्मेदार सदस्य नहीं है। कल्याण पाल का कहना है कि उन्हें हमेशा यह चिंता रहती थी कि उनकी मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार, कर्मकांड और भंडारा सही तरीके से होगा या नहीं। चूंकि उनके पीछे यह सब करने वाला कोई नहीं है, इसलिए उन्होंने सब कुछ अपनी आंखों के सामने ही करा लिया। कल्याण पाल ने कहा कि अब उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। उनका मानना है कि जब भी उन्हें मौत आएगी, वह सुकून से मर सकेंगे, क्योंकि वह अपने जीवन में ही अपने अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कर्मकांड पूरे कर चुके हैं। यह अनोखा आयोजन अब पूरे शिवपुरी जिले सहित सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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शिवपुरी में बुजुर्ग ने जीते-जी कराया अपना मृत्यु भोज:प्रयागराज में कर्मकांड; अंतिम संस्कार की चिंता में गंगा पूजन से भंडारे तक खुद निभाईं सारी रस्में














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