बैतूल के सदर बाजार में मोबाइल चोर पकड़ाया:चोरी के बाद मोबाइल साथी को सौंपा; झारखंड निवासी युवक को हिरासत में लिया




बैतूल के सदर बाजार में रविवार दोपहर मोबाइल चोरी की घटना सामने आई। सदर काफी हाउस के पास सब्जी खरीदने आए लोगों के बीच घूम रहे एक नाबालिग युवक को संदिग्ध गतिविधियों के दौरान रंगे हाथों पकड़ लिया गया। बाद में उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर करीब 12 बजे बाजार में कुछ नाबालिग लड़के बिना खरीदारी किए इधर-उधर घूमते नजर आए। बाजार में मौजूद राजेश प्रजापति और अन्य लोगों ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान एक युवक को मोबाइल चोरी करते हुए पकड़ लिया गया। पूछताछ में सामने आए अन्य साथी मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और नाबालिग युवक को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की। राष्ट्रीय हिंदू सेना के प्रदेश अध्यक्ष दीपक मालवीय के मुताबिक युवक ने पूछताछ में खुद को बाहरी क्षेत्र का निवासी बताया। उसने यह भी कहा कि उसके अन्य साथी भी बाजार में घूम रहे हैं। कोतवाली टीआई देवकरण डहरिया ने बताया कि नाबालिग ने चोरी करने के बाद मोबाइल एक बड़े व्यक्ति को सौंप दिया था। नाबालिग की निशानदेही पर उस व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है, जो खुद को झारखंड का निवासी बता रहा है। पुलिस फिलहाल दोनों से पूछताछ कर रही है और पूरे गिरोह का पता लगाने में जुटी हुई है। बाजारों में फिर सक्रिय हुए मोबाइल चोर स्थानीय लोगों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता के चलते युवक को समय रहते पकड़ लिया गया। सदर और कोठीबाजार के साप्ताहिक बाजारों में पहले भी मोबाइल चोरी की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। कुछ समय तक इन वारदातों पर रोक लगी थी, लेकिन अब फिर चोरी की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में पुलिस की ओर से निगरानी का कोई स्थायी तंत्र नजर नहीं आता। बाजार के दिनों में जेबकतरे और मोबाइल चोर सक्रिय रहते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। इटारसी-नागपुर से आने की आशंका बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक इटारसी और नागपुर की ओर से मोबाइल चोर गिरोह बाजार वाले दिन बैतूल पहुंचते हैं। इन गिरोहों में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल रहते हैं, जो भीड़ का फायदा उठाकर मौका मिलते ही मोबाइल चोरी कर लेते हैं। जानकारों का कहना है कि अब मोबाइल ट्रैक होने के डर से गिरोह मोबाइल सीधे बेचने के बजाय उसके पुर्जे अलग-अलग कर बेच देते हैं। इससे पुलिस के लिए मोबाइल तक पहुंचना और आरोपियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।



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