Dewas Blast: Sixth Accused Kapil Vij Arrested


देवास के टोंककला पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में SIT ने बड़ी कार्रवाई की। मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद से SIT लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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SIT पिछले कई दिनों से दिल्ली के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही थी। लगातार निगरानी और जांच के बाद मंगलवार को SIT ने कपिल विज को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। मुख्य आरोपी मुकेश विज चाइना में छिपा है। बम (पटाखे) बनाने की मशीनें लेने गया है।

भास्कर ने पहले ही बता दिया था मुख्य आरोपी का ठिकाना

भास्कर डिजिटल ने अपनी रिपोर्ट में पहले ही खुलासा कर दिया था कि- देवास की पटाखा फैक्ट्री अनिल मालवीय के नाम पर है, लेकिन इसका असली मालिक दिल्ली निवासी मुकेश विज है। वह इस समय चीन में है। इसके बाद SIT की टीम ने छापेमारी कर मुख्य आरोपी के भाई को दबोचा।

SIT की टीम ने मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार किया।

SIT की टीम ने मुख्य आरोपी मुकेश विज के भाई कपिल विज को दिल्ली से गिरफ्तार किया।

फैक्ट्री संचालन में कपिल महत्वपूर्ण भूमिका

जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री के संचालन में मुख्य आरोपी मुकेश विज के साथ उसके भाई कपिल विज की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी। SIT ने जब मामले में घायल लोगों, फैक्ट्री कर्मचारियों और अन्य आरोपियों से पूछताछ की, तब कपिल विज का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे मामले में छठा आरोपी बनाया।

देवास में धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी।

देवास में धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी।

देवास से SIT की टीम दिल्ली भेजी गई थी

जांच एजेंसी के मुताबिक, फैक्ट्री संचालन और गतिविधियों में कपिल की संलिप्तता के पर्याप्त तथ्य मिले हैं। इन्हीं आधारों पर देवास से SIT की एक विशेष टीम दिल्ली भेजी गई थी, जिसने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अब तक इस मामले में कुल छह आरोपियों को नामजद किया जा चुका है।

शुरुआती जांच में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मुख्य आरोपी के रूप में मुकेश विज का नाम सामने आया। अब उसके भाई कपिल विज की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है।

मुख्य आरोपी मुकेश विज की तलाश जारी

देवास एसपी पुनित गहलोत ने बताया कि कपिल विज को गिरफ्तार कर दिल्ली से देवास लाया जा रहा है। मुख्य आरोपी मुकेश विज की तलाश लगातार जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि उसे भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भास्कर डिजिटल की रिपोर्ट में खुलासे के बाद एक्शन

16 मई को प्रशासन ने SDM संजीव सक्सेना, नायब तहसीलदार रवि शर्मा, सोनकच्छ SDOP दीपा मांडवे और टोंककला चौकी प्रभारी रमनदीप हुंडल को सस्पेंड कर दिया था। हालांकि हादसे के कई दिन बाद भी फैक्ट्री संचालन, विस्फोटक भंडारण और सुरक्षा निगरानी से जुड़े अन्य जिम्मेदार अफसरों पर अब तक FIR नहीं हुई है।

दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि कम बारूद के लाइसेंस पर फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर विस्फोटक जमा किया गया था। मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के काम कराया जा रहा था, जबकि जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

हादसे के बाद सवाल उठे कि नियमित निरीक्षण करने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे और इतनी बड़ी लापरवाही कैसे नजरअंदाज होती रही। मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया और चार अधिकारियों पर गाज गिरी, लेकिन अब भी कई विभागों की जवाबदेही और कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं।

जांच में सामने आया- गंभीर लापरवाही बरती

निलंबन आदेश में कहा गया है कि अधिकारियों ने विस्फोटक सामग्री से जुड़े नियमों और प्रशासनिक निरीक्षण में गंभीर लापरवाही बरती। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री की नियमित जांच नहीं की गई, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों को हर महीने यह देखना था कि लाइसेंस के अनुसार ही विस्फोटक सामग्री रखी जा रही है या नहीं।

राजस्व विभाग उन छह विभागों में शामिल है जिन्हें ऐसी फैक्ट्रियों के लिए NOC और निगरानी की जिम्मेदारी रहती है। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती रही और किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

6 महीने पहले ही फैक्ट्री की शुरुआत

टोंककला के पास जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, वह महज छह माह पहले ही शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि संचालक को पटाखों का बड़ा ऑर्डर मिला था, जिसे बारिश से पहले हर हाल में पूरा करना था। इसी वजह से बड़ी संख्या में मजदूर बुलाए गए थे।

फैक्ट्री में उत्तर प्रदेश, बिहार और देवास के मजदूर काम कर रहे थे। इसके अलावा ठेकेदारों के जरिए और मजदूर बुलाने की तैयारी भी चल रही थी। बड़े पैमाने पर विस्फोटक रखकर पटाखे बनाए जा रहे थे।

नियमों को ताक पर रखकर बना रहे थे पटाखे

प्रदेश में विस्फोटक रखने को लेकर सख्त नियम हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनका पालन नहीं किया गया। फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय ने 15 किलो विस्फोटक रखने का लाइसेंस ले रखा था।

नियमों के तहत इतनी मात्रा से अधिकतम 600 किलो पटाखे बनाए और रखे जा सकते थे, लेकिन मौके पर टनों में विस्फोटक और तैयार पटाखे मिले। साफ है कि जिम्मेदार अफसरों ने कभी जांच तक नहीं की।

नियमों के मुताबिक 15 किलो से अधिक विस्फोटक के लिए भोपाल से विशेष लाइसेंस लेना पड़ता है, जिसमें सुरक्षा इंतजामों से लेकर मजदूरों की संख्या तक के कड़े प्रावधान हैं। इसके बावजूद यहां छोटे लाइसेंस की आड़ में भारी मात्रा में विस्फोटक रखा गया और पटाखे बनाए जा रहे थे।

निर्माण अधूरा, सुरक्षा इंतजाम नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि फैक्ट्री का निर्माण पूरा हुए बिना लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया। क्या किसी अधिकारी ने यहां आकर सुरक्षा इंतजामों की जांच की थी? जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, वह पूरी तरह तैयार भी नहीं थी।

बाहर सिर्फ फेंसिंग की गई थी, जबकि अंदर के ब्लॉक अधूरे थे। नई मशीनें लगाई गई थीं और 50 से अधिक जगहों पर हाथों से पटाखे बनाए जा रहे थे। हालात यह थे कि सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं थी। न फर्स्ट एड, न इमरजेंसी इलाज और न ही आग बुझाने के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था।

आधे अधूरे निर्माण के बावजूद फैक्ट्री में पटाखे बनाने का काम चल रहा था।

आधे अधूरे निर्माण के बावजूद फैक्ट्री में पटाखे बनाने का काम चल रहा था।

नाबालिगों से भी कराया जा रहा था काम

हादसे में घायल अधिकांश मजदूर बिहार के बताए जा रहे हैं। इनमें कई की उम्र 18 वर्ष से कम बताई जा रही है। ऐसे में श्रम विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

तहसीलदार, पटवारी और एसडीएम जैसे जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे। विस्फोटकों के बीच मजदूर बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के काम कर रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

तीन बीघा में फैली फैक्ट्री, छह ब्लॉकों में काम

आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर टोंककला के पास स्थित यह फैक्ट्री करीब तीन बीघा क्षेत्र में फैली है। फैक्ट्री का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ था, इसके बावजूद यहां उत्पादन शुरू कर दिया गया। जिस ब्लॉक में धमाका हुआ वह करीब 50 फीसदी उड़ गया। वहीं अन्य छह ब्लॉकों में भी विस्फोटक से पटाखे बनाने का काम चल रहा था।

आग लगने के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।

आग लगने के बाद पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।

सांसद से करीबी रिश्ते के पोस्ट वायरल

हादसे के बाद पुलिस ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर उसकी सांसद से करीबी दर्शाने वाली कई तस्वीरें और पोस्ट वायरल हो रही हैं, जिनमें देवास सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी उन्हें मिठाई खिलाते नजर आ रहे हैं।

हालांकि हादसे के बाद सांसद ने सोशल मीडिया पर दु:ख जताया, लेकिन फैक्ट्री में नियमों की अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या संचालक को राजनीतिक संरक्षण हासिल था।

सांसद महेंद्र सिंह की फैक्ट्री संचालक अनिल को मिठाई खिलाते तस्वीर वायरल हो रही।

सांसद महेंद्र सिंह की फैक्ट्री संचालक अनिल को मिठाई खिलाते तस्वीर वायरल हो रही।

लाइसेंस के सवाल पर कमिश्नर बोले-बाद का विषय

फैक्ट्री किसके नाम पर थी, लाइसेंस में कितना विस्फोटक रखने की पात्रता थी? मीडिया के इन सवालों पर उज्जैन संभाग कमिश्नर आशीष सिंह ने सिर्फ इतना कहा कि पहले घायलों का इलाज करवा रहे हैं। वह बाद का विषय है। उन्होंने बताया कि सभी घायलों का इलाज प्राथमिकता है और ज्यादातर घायलों की हालत खतरे से बाहर है।

कांग्रेस ने हादसे को बताया था सामूहिक हत्याकांड

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा था कि मध्य प्रदेश सरकार का चेहरा अब “सामूहिक हत्याकांड” जैसा बन गया है। पहले क्रूज हादसे में लोगों की मौत हुई, फिर इंदौर में जहरीले पानी से लोगों की जान गई, हरदा में पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ और अब देवास में भी बड़ा विस्फोट हो गया।

प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भयावह तस्वीर

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा था कि देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुआ विस्फोट केवल हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट सिस्टम की भयावह तस्वीर है। उन्होंने कहा, “5 मजदूरों की दर्दनाक मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल, महिलाओं के लापता होने की खबरें और शवों के अवशेष 20-25 फीट दूर तक बिखर जाना बेहद विचलित करने वाला है।”

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया था कि ग्रामीण लगातार फैक्ट्री के अवैध संचालन की शिकायत करते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दोषी फैक्ट्री संचालकों, जिम्मेदार अधिकारियों और संरक्षण देने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

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