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बालाघाट जिले में शुक्रवार को ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के विरोध में दवा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। बालाघाट मेडिकल एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर 24 घंटे के इस बंद के दौरान जिले की सभी 1300 दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां ठप रहीं। केमिस्टों का आरोप है कि केंद्र सरकार ई-फार्मेसी को बढ़ावा देकर जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रियंक वर्मा ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना किसी सही जांच-पड़ताल के दवाएं बेच रहे हैं। एक ही पर्ची पर बार-बार दवाइयां देना और फर्जी पर्चों के आधार पर नशीली दवाओं की सप्लाई करना समाज के लिए गंभीर खतरा है। केमिस्टों ने धरना देकर प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा और ई-फार्मेसी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। केमिस्टों की अनदेखी से नाराजगी दवा विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना काल में ऑनलाइन दवा बिक्री की छूट दी गई थी, जिसे अब बंद कर देना चाहिए। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) लंबे समय से इसके खिलाफ आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इससे न केवल केमिस्टों के व्यापार पर असर पड़ रहा है, बल्कि सरकारी नियमों का भी उल्लंघन हो रहा है। सरकारी केंद्रों पर रही दवाओं की व्यवस्था हड़ताल के दौरान मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, संजीवनी क्लीनिक और जन औषधि केंद्रों पर दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा गया था। आपातकालीन स्थिति के लिए कुछ दवा दुकानदारों के नंबर भी जारी किए गए थे। विभाग का दावा है कि बंद के दौरान दवाओं की आपूर्ति को लेकर जिले में कोई बड़ी परेशानी सामने नहीं आई।
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बालाघाट में ऑनलाइन दवा बिक्री विरोध में सभी मेडिकल बंद:फर्जी पर्चों के आधार पर नशीली दवाओं की सप्लाई हो रही















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