कलेक्टरों की टीएल मीटिंग में रैगिंग, बुलिंग, उत्पीड़न का एजेंडा:स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ के मामले हर हफ्ते रखे जाएंगे समय सीमा बैठकों में




जिलों में अब कलेक्टर द्वारा ली जाने वाली (टाइम लिमिट) समय-सीमा बैठकों में विद्यार्थियों के मेंटल हेल्थ से जुड़े मामलों की भी हर हफ्ते रिपोर्ट ली जाएगी। राज्य शासन ने इसके निर्देश सभी जिलों को दिए हैं और कहा है कि इससे कॉलेज, कोचिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग, बुलिंग एवं उत्पीड़न के मामले रुकेंगे और क्विक एक्शन सिस्टम बनेगा। जिलों में हर संस्थान में काउंसलर की नियुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य रेफरल प्रणाली विकसित करने के लिए भी कहा है। अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने यह निर्देश विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए गठित मॉनिटरिंग एंड इम्प्लीमेंटेशन फ्रेमवर्क कमेटी की मींटिंग में दिए हैं। उन्होंने कहा कि गार्जियन ट्यूटर योजना, मेंटरशिप सिस्टम को प्रभावी बनाने, भेदभाव, सार्वजनिक अपमान एवं अत्यधिक शैक्षणिक दबाव पर रोक लगाने पर फोकस करें। साथ ही हेल्पलाइन एवं आपात मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था करने तथा शिक्षक एवं कर्मचारियों को नियमित मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देने की भी कार्यवाही की जाए। एसीएस राजन ने संस्थानों में एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एलजीबीटीक्यू एवं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संबंधित हेल्पलाइन नंबरों का स्कूलों एवं महाविद्यालयों में व्यापक प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों को इनके उपयोग के प्रति जागरुक करने को कहा। राजन ने कहा… सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार जिला स्तर पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स एवं राज्य स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स का गठन किया जा चुका है। अपर मुख्य सचिव राजन ने निर्देश दिए कि जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समितियों की बैठक हर माह नियमित रूप से की जाए तथा उसकी जानकारी राज्य स्तर पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलों में आयोजित होने वाली समय-सीमा बैठकों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। ये नंबर सार्वजनिक कराने कहा अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की स्टडी करें अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सभी संबंधित विभाग गंभीरता से अध्ययन करें और उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी करें। उन्होंने रैगिंग, बुलिंग एवं उत्पीड़न की रोकथाम तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करने तथा खेल, कला एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। नियमित करियर काउंसलिंग एवं वैकल्पिक करियर मार्गदर्शन, छात्रावासों को नशा मुक्त एवं सुरक्षित बनाए रखने तथा कोचिंग हब में विशेष मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।



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