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मेरठ छावनी क्षेत्र में रक्षा भूमि पर कथित अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अब नए सिरे से कार्रवाई शुरू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के सेंट्रल मार्केट पर दिए आदेशों के बाद छावनी क्षेत्र की जमीन भी रक्षा संपदा विभाग (डीईओ) के रडार पर आ गई है। उच्च न्यायालय में गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल का मामला खारिज होने के बाद, रक्षा संपदा अधिकारी मेरठ मंडल ने एक सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसमें वेस्ट जो एंड रोड स्थित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर परिसर खाली करने और प्रशासनिक कार्रवाई में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही, डीईओ ने उप व्हीलर्स क्लब और रेस क्लब जैसे संस्थानों को भी नोटिस जारी किया है। इन क्लबों से सैन्य जमीन पर क्लब संचालन और कब्जे के आधार की जानकारी मुहैया कराने के लिए कहा गया है। डीईओ की सार्वजनिक सूचना के अनुसार, बंगलो संख्या 227, जीएलआर सर्वे नंबर 375 स्थित रक्षा भूमि पर अवैध निर्माण और अनधिकृत उपयोग के संबंध में 7 अक्टूबर 1994 को लोक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 की धारा 5-बी (1) के तहत वैधानिक नोटिस जारी किया गया था। इसके खिलाफ दायर मिसलेनियस अपील नंबर 284/1994 को जिला न्यायालय मेरठ ने 18 जुलाई 1995 को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर रिट याचिका संख्या 43498/2000 (गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल बनाम एस्टेट ऑफिसर एवं अन्य) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 मई 2010 को निरस्त करते हुए अंतरिम आदेश समाप्त कर दिए थे। अब विभाग ने 23 अप्रैल 2026 से दोबारा वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। डीईओ ने अपनी सार्वजनिक सूचना में सुप्रीम कोर्ट के मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण सहित विभिन्न फैसलों का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक और रक्षा भूमि पर अवैध कब्जा, अनधिकृत निर्माण और नियम विरुद्ध गतिविधियों को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। प्रशासन ऐसे अतिक्रमण हटाने के लिए बाध्य है, क्योंकि रक्षा भूमि राष्ट्रीय संपत्ति है। डीईओ कार्यालय के अनुसार, स्कूलों को मान्यता के लिए लैंड रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट देना पड़ता है। कैंट के स्कूलों को डीईओ कार्यालय से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी नहीं किया गया है।
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गुरु तेग बहादुर स्कूल का मामला उच्च न्यायालय में खारिज:परिसर 7 दिन में खाली करने का आदेश, क्लबों को भी नोटिस















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