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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, तेज और जनकेंद्रित बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर मिलने वाली सही सूचना अनमोल जिंदगियां बचा सकती है। इसलिए मौसम के पूर्वानुमान को सिर्फ फाइलों और तकनीकी दफ्तरों तक सीमित न रखकर, गांवों के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए। 13 मई के तूफान की हुई समीक्षा, 130 किमी/घंटा तक थी रफ्तार बैठक में पिछले दिनों 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा रिपोर्ट पेश की गई। अधिकारियों ने बताया कि मौसम विभाग (IMD) का सिस्टम इस आपदा पर 7 दिन पहले से नजर रखे हुए था। शुरुआत में ‘येलो वार्निंग’ जारी हुई थी, जिसे बाद में ‘ऑरेंज’ और फिर ‘रेड अलर्ट’ में बदला गया। कई इलाकों में हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर और उन्नाव जैसे जिलों में ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म के जरिए कलर-कोडेड नाउकास्ट (3 घंटे का एडवांस) अलर्ट भेजा गया था। अब लाउडस्पीकर और मोबाइल बनेंगे सुरक्षा कवच मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अलर्ट सिस्टम को सीधे जनता से जोड़ा जाए। इसके लिए “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” फॉर्मूले पर काम होगा: स्थानीय माध्यम: आईवीआरएस (IVRS) कॉल, पंचायत स्तर पर लगे लाउडस्पीकर, लोकल एफएम रेडियो और सोशल मीडिया का पूरा इस्तेमाल हो। ग्राउंड टीम एक्टिव: ग्राम प्रधान, लेखपाल, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए चेतावनी तुरंत नीचे तक पहुंचे। जागरूकता अभियान: स्कूलों और पंचायतों में लोगों को सिखाया जाए कि बिजली कड़कने या आंधी आने पर क्या करें और क्या न करें। कमजोर होर्डिंग्स, पेड़ों और बिजली के खंभों का पहले से सुरक्षा ऑडिट हो। रडार और वेदर स्टेशनों का बिछेगा जाल यूपी को मौसम विज्ञान के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज (वर्षा मापी केंद्र) काम कर रहे हैं। लखनऊ, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा बरेली, देवरिया और प्रयागराज में भी अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया चल रही है। लखनऊ और प्रयागराज में हवा की गति और दिशा भांपने वाले विंड प्रोफाइलर रडार लगाए जा रहे हैं। 15 विभागों का बनेगा अलग ‘डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान’ यूएनडीपी (UNDP) के सहयोग से उत्तर प्रदेश के 15 सरकारी विभागों, सभी 75 जिलों और 20 प्रमुख शहरों के लिए कस्टमाइज्ड ‘डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान’ तैयार हो रहा है। इसके तहत जमीनी स्तर पर बड़ी तैयारी की गई है। वर्ष 2025 में 44 जिलों की 118 तहसीलों में करीब 1800 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी गई, जिन्होंने 2361 गांवों में जागरूकता फैलाई। बोट हादसों को रोकने के लिए 38 संवेदनशील जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट बांटे गए हैं और ‘आपदा मित्र’ वॉलंटियर्स को बीमा सर्टिफिकेट दिए गए हैं।
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450 वेदर स्टेशन और डॉप्लर रडार से लैस हुआ यूपी:2000 रेन गेज 24 घंटे रख रहे निगरानी, हवा की स्पीड मापने वाले विंड प्रोफाइलर लगाए जा रहे















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