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ललितपुर में झांसी से आई विजिलेंस की टीम ने गुरुवार को कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी और एक कनिष्ठ सहायक को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर क्लीनिक का लाइसेंस जारी करने के एवज में एक चिकित्सक से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। आरोपियों के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई बांसी निवासी उदयराम वर्मा की शिकायत पर की गई। उदयराम ने अपने घर पर क्लीनिक खोलने के लिए 16 अप्रैल 2026 को क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। लाइसेंस जारी करने के बदले डेढ़ लाख रुपए की मांग शिकायतकर्ता के मुताबिक, कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी अर्जुन लाल अहिरवार ने लाइसेंस जारी करने के बदले डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। इसमें 1 लाख रुपए पहले और बाकी 50 हजार रुपए लाइसेंस जारी होने के बाद देने की बात कही गई थी। आरोप है कि अधिकारी ने पैसे कार्यालय के बाबू रामकृष्ण गुप्ता की मौजूदगी में देने को कहा था। उदयराम वर्मा ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए झांसी स्थित उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोपियों को रिश्वत लेते हुए पकड़वाने की इच्छा जताई थी। विजिलेंस टीम ने मामले की गोपनीय जांच की, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद 21 मई 2026 को विजिलेंस ट्रैप टीम ने जाल बिछाया। टीम ने कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी अर्जुन लाल अहिरवार और कनिष्ठ सहायक रामकृष्ण गुप्ता को शिकायतकर्ता से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ सदर कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जांच की जा रही है।
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आयुर्वेदिक अधिकारी और बाबू 1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार:ललितपुर में क्लीनिक लाइसेंस जारी करने के लिए मांगा डेढ़ लाख रुपए















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