इंदौर में पानी की राजनीति:24 घंटे में बदले सुर, महेंद्र हार्डिया महापौर के घर पहुंचे, खुलकर की तारीफ




इंदौर में जल संकट और पानी की टंकी बनाने को लेकर मंगलवार को भाजपा के दो बड़े चेहरे आमने-सामने नजर आए, लेकिन महज 24 घंटे बाद बुधवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई। विधायक महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा क्रमांक-5 के साथ भेदभाव और पानी की टंकियों को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। बुधवार को वे भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव के निवास पहुंचे और जल वितरण व्यवस्था की खुलकर सराहना की। मंगलवार को सामने आई राजनीतिक तनातनी ने शहर की राजनीति में हलचल मचा दी थी। जानकारी सामने आई थी कि अमृत-2 योजना के तहत बनने वाली पानी की टंकियों को लेकर विधायक हार्डिया खासे नाराज हैं। उनका आरोप था कि शहर में 40 टंकियां बनाई जा रही हैं, लेकिन विधानसभा-5 को सिर्फ एक टंकी दी गई। बताया गया कि जल संकट और आधी भर रही टंकियों को लेकर हार्डिया के समर्थक पार्षद प्रदर्शन की तैयारी में थे। भूमिपूजन में तनाव की स्थिति बनी मामला इतना बढ़ा कि भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान भी तनाव की स्थिति बन गई और विधायक नाराज होकर कार्यक्रम छोड़कर चले गए। सूत्रों के मुताबिक हार्डिया ने भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था। वहीं महापौर पक्ष का कहना था कि विधानसभा-5 में पहले भी सबसे ज्यादा टंकियां बनाई गई हैं और नई टंकियों को लेकर विधायक से लोकेशन भी मांगी गई थी। बदले राजनीतिक सुर बुधवार को माहौल पूरी तरह बदला नजर आया। विधायक महेंद्र हार्डिया और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा महापौर निवास पहुंचे, जहां जल संकट और वितरण व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान विधायक हार्डिया ने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम की टीम लगातार दिन-रात मेहनत कर रही है, जिसके कारण शहर में पानी का वितरण सुचारु रूप से हो रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को भाजपा के भीतर बढ़ती नाराजगी को शांत करने और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक संदेश भी साफ मंगलवार को जहां पानी की टंकियों को लेकर भाजपा के भीतर खींचतान खुलकर सामने आई थी, वहीं बुधवार की तस्वीर ने यह संकेत देने की कोशिश की कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल कायम है। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि जल संकट और विधानसभा-5 में पानी की समस्या को लेकर नाराजगी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन सार्वजनिक रूप से दोनों नेताओं का साथ आना राजनीतिक तौर पर बड़ा संदेश माना जा रहा है।



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