विदेश जाने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए बनेगा कानून




झारखंड सरकार विदेशों में रोजगार दिलाने के नाम पर हो रही धोखाधड़ी और श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है। श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से झारखंड ओवरसीज इम्प्लॉयमेंट (रेगुलेशन, फैसिलिटेशन एंड वेलफेयर) एक्ट तैयार किया जा रहा है। फिलहाल प्रस्ताव शुरुआती चरण में है। इस कानून का उद्देश्य झारखंड के श्रमिकों को सुरक्षित और कानूनी तरीके से विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराना है। सरकार चाहती है कि विदेश जाने वाले मजदूरों को सही जानकारी, उचित सुविधा और सुरक्षा मिले, ताकि वे किसी तरह की ठगी या शोषण का शिकार न हों। यह कानून केंद्र सरकार के मौजूदा ‘उत्प्रवास अधिनियम, 1983’ के साथ मिलकर काम करेगा। प्रस्तावित कानून के तहत राज्य और जिला स्तर पर मजबूत शिकायत निवारण तंत्र बनाया जाएगा। यदि किसी श्रमिक को विदेश में नौकरी के दौरान परेशानी होती है या उनके परिवार को कोई शिकायत रहती है, तो वे आसानी से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। जिला स्तर पर यह व्यवस्था उपायुक्त के अधीन काम करेगी, जिससे शिकायतों का जल्द समाधान हो सकेगा। कानून लागू होने के बाद विदेश भेजने वाली सभी कंपनियों और एजेंसियों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना लाइसेंस और पंजीकरण के कोई भी एजेंसी श्रमिकों को विदेश नहीं भेज सकेगी। इससे फर्जी एजेंसियों और बिचौलियों पर रोक लगने की उम्मीद है। साथ ही विदेश जाने वाले श्रमिकों को पहले से जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। विदेशों में काम करनेवालों का बनेगा डाटाबेस सरकार नए कानून के तहत विदेशों में काम कर रहे श्रमिकों का व्यवस्थित डाटाबेस भी तैयार करेगी। इससे किसी वैश्विक संकट या आपात स्थिति में श्रमिकों की मदद करना आसान होगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून श्रमिकों की सुरक्षा और विदेश रोजगार व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। राज्य के कई जिलों से बड़ी संख्या में मजदूर विदेशों में काम करने जाते हैं। इनमें हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो और संथाल परगना प्रमंडल के जिले शामिल हैं। विदेशों में श्रमिकों के फंसने, अनुबंध उल्लंघन, वेतन नहीं मिलने और कार्यस्थल पर शोषण की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। नए एक्ट के जरिए ऐसे मामलों में श्रमिकों को मदद मिल सकेगी।



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