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मोहन सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के अफसर अब शिक्षकों के वेतन से पैसा काटकर उनके लिए कल्याण योजनाएं चलाएंगे। इसको लेकर लोक शिक्षण आयुक्त ने 15 शिक्षक संगठनों को पत्र लिखकर 26 मई को उन्हें बैठक के लिए बुलाया है और उनसे शिक्षकों के वेतन से राशि कटौती कराने का फैसला कराया जाएगा। शिक्षा विभाग के इस पत्र का विरोध भी हो रहा है कि सरकार शिक्षकों के वेतन से कटौती करके किस तरह का कल्याण करना चाह रही है। शिक्षकों के हित में फैसला लेना तो सरकार की जिम्मेदारी है। लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गठित शिक्षक कल्याण प्रतिष्ठान ने राज्य कार्यकारिणी समिति की 19 नवम्बर को हुई बैठक में निर्णय लिया था कि शिक्षकों के कल्याण के चलाई जाने वाली योजनाओं के संचालन के लिए शिक्षकों से हर साल अंशदान के रूप में वेतन से कटौती की जाएगा। इस फैसले पर सुझाव और सहमति लेने के लिए 26 मई को लोक शिक्षण आयुक्त के सभागार में संगठनों की बैठक बुलाई गई है। बैठक की अध्यक्षता अपर परियोजना संचालक, समग्र शिक्षा एवं पदेन अपर संचालक लोक शिक्षण द्वारा की जाएगी। कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शिक्षकों के कल्याण के लिए सरकार को फैसला करना है तो कटोत्रा किस बात का होगा? पहले ही शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है और अतिथि शिक्षक के नाम पर कभी नौकरी पर रखा जा रहा है तो कभी नौकरी से निकाला जा रहा है। न पेंशन मिल रही है और न ही स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। अब इस तरह के कटोत्रा के जरिये सरकार वेतन से राशि काटने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री 28 मई को करेंगे कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक उधर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 28 मई को प्रमुख कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं। मध्यप्रदेश कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने इसके लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा है और कर्मचारियों की समस्याओं को सुनने के लिए कहा है।
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शिक्षकों के वेतन से कटौती कर कल्याण योजनाएं चलाएगी सरकार:सुझाव और सहमति लेने स्कूल शिक्षा विभाग ने बुलाई शिक्षा जगत के कर्मचारी संगठनों की बैठक
















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