11 साल पुराने मामले में आरोपी दोषी करार:कोर्ट ने सुनाई 10 साल सश्रम कारावास की सजा, महिला की हत्या कर चोरी की थी




जालौन के कोंच कोतवाली क्षेत्र में साल 2015 में हुई घर में घुसकर वृद्ध महिला पर फावड़े से जानलेवा हमला करने और नकदी व बैंक पासबुक चोरी करने के मुवीन पुत्र कल्लू कबाड़ी को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही उसे 4 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया हैं। वह नया पटेलनगर, कोंच का रहने वाला है। अपर शासकीय अधिवक्ता हृदेश पांडेय के अनुसार नया पटेलनगर निवासी अनिल कुमार ने कोतवाली कोंच में तहरीर देकर बताया था कि 15 फरवरी 2015 की रात उसकी मां कुंवरबाई अपने कोंच नगर में बने मकान में अकेली थीं। रात करीब आठ बजे वह घर की कुंडी लगाकर शौच के लिए खेतों की ओर गई थीं। जब वह वापस लौटीं तो उन्होंने घर के अंदर मोहल्ले का ही रहने वाला मुवीन पुत्र कल्लू कबाड़ी को खड़ा देखा। महिला द्वारा पूछे जाने पर आरोपी ने कहा कि वह कंडे लेने आया है। इसी दौरान उसने अचानक फावड़े से महिला के सिर पर हमला कर दिया। हमले में कुंवरबाई गंभीर रूप से घायल होकर खून से लथपथ हो गईं। इसके बाद आरोपी घर में रखा बक्सा तोड़कर उसमें रखे 10 हजार रुपये और इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की पासबुक लेकर मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी पड़ोसियों ने फोन के माध्यम से महिला के बेटे अनिल कुमार को दी थी। वह मौके पर पहुंचा और घायल मां को पहले कोंच के सरकारी अस्पताल तथा बाद में गंभीर हालत में झांसी उपचार के लिए ले गया। बताया गया कि महिला का करीब 15 दिनों तक इलाज चला। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी मुवीन को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से पासबुक, नकदी तथा घटना में प्रयुक्त फावड़ा बरामद किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चन्द्र द्विवेदी की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी अनिल कुमार, घायल कुंवरबाई समेत पांच गवाहों को अदालत में पेश किया गया। सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और बरामदगी के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना और आईपीसी धारा 459 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा और 2 हजार का जुर्माना धारा 380 के तहत 3 वर्ष का कारावास, 1 हजार का जुर्माना और धारा 411 के तहत 3 वर्ष का कारावास और 1 हजार रूपये का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने में सफल रहा है। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और न्यायपालिका पर भरोसा जताया।



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