इंदौर में आम बेचने वाले ने गले पर रखा चाकू:बोला- ठेला ले गए तो जान दे दूंगा; नगर निगम कार्रवाई के दौरान हाईवोल्टेज ड्रामा, VIDEO




इंदौर में सड़क पर ठेला लेकर घूमना एक ठेले वाले को सोमवार दोपहर इतना भारी पड़ गया कि उसने अपना ठेला बचाने के लिए खुद के गले पर चाकू रख लिया। ठेले वाले ने यहां तक कह दिया कि यदि ठेला ले गए तो वह जान दे देगा। कार्रवाई के दौरान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। दरअसल, पलसीकर इलाके में रहने वाला 28 वर्षीय मोहम्मद शाहरुख सिद्दीकी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह पिछले 12-13 सालों से इंदौर में रह रहा है। उसने बताया कि सोमवार को वह आम का ठेला लेकर निकला था। जयरामपुर कॉलोनी में वह खाना खाने पहुंचा, लेकिन वहां उसे खाना नहीं मिला। इसके बाद वह पलसीकर चौराहे के पास पहुंचा। यहां खाना खाने के बाद जैसे ही वह ठेला लेकर निकला, तभी एक महिला ने उससे आम के दाम पूछे और दो किलो आम खरीद लिए। ठेला संचालक ने बताया कि आम देकर वह ठेला आगे बढ़ाने ही वाला था कि तभी अचानक वहां नगर निगम के कर्मचारी आ गए और उसे घेर लिया। उन्होंने ठेला सड़क किनारे लगवाया और आम भरने को कहा। विरोध करने पर कर्मचारी खुद ही आम भरने लगे। उसने उन्हें मना भी किया, लेकिन वे नहीं माने और ठेला उठाने के लिए बड़ी गाड़ी बुला ली। लोगों की लगी भीड़, गले पर रख लिया चाकू मोहम्मद शाहरुख ने बताया कि इस दौरान वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। नगर निगम के कर्मचारी भी मौके पर इकट्ठा हो गए। वह लगातार उनसे मिन्नत करता रहा कि उसका ठेला छोड़ दें, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद उसने ठेले पर रखा चाकू उठाकर अपने गले पर रख लिया और कहा कि वह जान दे देगा। यह देखकर नगर निगम कर्मचारी भी चौंक गए। बाद में लोगों ने युवक को समझाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। नगर निगम ने उसका ठेला तो छोड़ दिया, लेकिन पास में खड़े एक अन्य ठेले वाले का ठेला जब्त कर लिया। ठेले पर थे 160 किलो आम, लोगों से उधार लेकर खरीदा था मोहम्मद शाहरुख ने बताया कि पहले वह दूसरों के ठेले पर काम करता था, लेकिन अब खुद का ठेला लगाता है। वह लोगों से उधार लेकर माल खरीदता है और आम बेचने के बाद उनका पैसा लौटाता है। सोमवार को उसके ठेले पर 160 किलो आम थे। ये आम भी उसने उधार लेकर खरीदे थे। उसने कहा कि वह खुद का खर्च कम करके गांव में अपने माता-पिता को पैसे भेजता है। अगर नगर निगम उसका ठेला और माल जब्त कर लेता, तो उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता।



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