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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गोमती नदी के रिवर बेड पर कथित अवैध कब्जे के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने संबंधित तहसीलदार को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने संबंधी लंबित कार्यवाही जल्द निस्तारित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, नीलांश ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों व व्यक्तियों को नोटिस जारी कर 7 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने दीपक शुक्ला द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार द्वारा दाखिल शपथपत्र देखने पर न्यायालय ने पाया कि नदी क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण होने की बात स्वीकार की गई है। इसके बावजूद, यूपी राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई लंबित रखी जा रही थी। इस पर न्यायालय ने तहसीलदार को अगली सुनवाई तक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने नीलांश थीम वाटर पार्क, नीलांश प्रॉपर्टीज, नीलांश बिल्डर्स के साथ-साथ संतोष श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव और मदन लाल को भी नोटिस जारी कर जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ग्राम बदैया और टिकरी कलां क्षेत्र में गोमती नदी के रिवर बेड की जमीन पर अवैध कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि एसडीएम मलिहाबाद ने 20 जनवरी 2020 को ही कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक उसका पालन नहीं कराया गया है।
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गोमती रिवर बेड पर अवैध कब्जे पर लखनऊ हाईकोर्ट सख्त:नीलांश ग्रुप को नोटिस, अतिक्रमण हटाने का दिया आदेश














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