लखनऊ पुलिस लाइन के सिपाही सुनील शुक्ला निलंबित:12 दिन में 6 वीडियो जारी कर लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप, बोले- सत्य का नशा है




लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला को सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो पोस्ट कर विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाने के मामले में निलंबित कर दिया गया है। बीते 12 दिनों में 6 वीडियो जारी कर चुके सिपाही ने खुद को प्रताड़ित किए जाने और सिस्टम में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। निलंबन के बाद भी उनके तेवर नरम नहीं पड़े हैं। तीसरे वीडियो के बाद बढ़ा विवाद, मुख्यमंत्री से किए सीधे सवाल 7 और 8 मई के बाद 10 मई को जारी तीसरे वीडियो में सुनील शुक्ला ने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि क्या वह कोई अपराधी, आतंकवादी या नक्सलवादी हैं, जो उनके घर रात एक बजे पुलिस भेजी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 6-7 पुलिसकर्मी देर रात उनके घर पहुंचे, जिससे उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया।
‘डराया नहीं जा सकता’, वीडियो में दिखे आक्रामक तेवर वीडियो में सिपाही ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी तरह के दबाव से चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा—“मेरी मां ने गीदड़ नहीं, शेर पैदा किया है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें रोकना है तो उनकी हत्या करानी पड़ेगी, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट के बाद 12 पुलिसकर्मी हटाए गए वीडियो वायरल होने के बाद 11 मई को पुलिस लाइन में तैनात 12 पुलिसकर्मियों को हटा दिया गया था। हालांकि इसे प्रशासनिक कार्रवाई बताया गया, लेकिन पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश द्वारा 16 मई को जारी सोशल मीडिया गाइडलाइन के उल्लंघन के आरोप में सुनील शुक्ला को निलंबित किया गया। विभाग का कहना है कि सिपाही ने सेवा नियमों और आचरण संहिता का उल्लंघन किया है।
निलंबन के बाद भी तेवर कायम-‘सत्य का महंगा नशा करता हूं’ निलंबन के बाद भी सुनील शुक्ला अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि वह “सत्य का महंगा नशा” करते हैं और इस रास्ते से उन्हें कोई डिगा नहीं सकता। उनका दावा है कि वह अपनी बात आगे भी रखते रहेंगे। 7 मई से 19 मई के बीच सुनील शुक्ला ने 6 वीडियो जारी किए, जिनमें उन्होंने लगातार विभागीय व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के आरोप लगाए। इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग के भीतर कामकाज और अनुशासन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



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