Free treatment in government hospitals, but balance of Ayushman card holders is being deducted


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उज्जैन15 मिनट पहलेलेखक: बहादुर सिंह चौहान

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मप्र के सरकारी अस्पतालों में जहां हर आम व्यक्ति को मुफ्त उपचार मिलता है, वहीं गरीबों को इसके बदले रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। हालांकि यह रुपए लोगों को नकद नहीं देना पड़ते।

इसका भुगतान आयुष्मान कार्ड से संबंधित अस्पताल सीधे संबंधित मरीज के 5 लाख रुपए तक के इलाज की क्रेडिट लिमिट से करवा रहे हैं। यानी सामान्य या आर्थिक सक्षम लोगों को फ्री में इलाज हो जाता है और गरीब लोगों से इसकी कीमत वसूली जा रही है।

आयुष्मान कार्डधारी व्यक्ति के अस्पताल में भर्ती होते ही निजी कंपनी की टीम सक्रिय हो जाती है। बाकायदा प्राइवेट अस्पताल की तर्ज पर यहां भी छुट्टी करते समय इलाज की डिटेल व फाइनल बिल की आयुष्मान में एंट्री कर दी जाती है। इसका भुगतान भी हर 3 माह में रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा हो जाता है।

जबकि जिले के 9 निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज करने के लिए अधिकृत है। इनमें शहर के एसएन कृष्णा, चैरिटेबल, आरडी-गार्डी कॉलेज, अवंति, वेदा और ग्लोबल अस्पताल शामिल है। वहीं नागदा में राजा जन्मेजय, अविघ्न अस्पताल के अलावा बड़नगर का एसएस अस्पताल अधिकृत है। इनकी मॉनीटरिंग के लिए मिड इंडिया काम कर रही है। सरकारी अस्पतालों में यह प्रक्रिया कराने के लिए निजी कंपनी एमडी इंडिया को ठेका दिया है।

बुखार उल्टी-दस्त पर 1500, डिलीवरी पर 8 से 11 हजार का खर्च

जिला अस्पताल से 13 मई को ऑपरेशन से डिलीवरी के बाद 5 की छुट्टी हुई। इसमें आयुष्मान कार्डधारी रानी पति उमेश और अर्चना पति तरविंदर के 11-11 हजार रुपए के बिल बने है। जबकि बगैर कार्डधारी कविता पति मनीष, रीता पति अंकित और अंजली पति कंचन का न बिल बना और न ही पैसे लगे।

जो रानी और अर्चना की तुलना में आर्थिक रूप से समक्ष हैं। ऐसे ही नॉर्मल डिलीवरी के बाद डिस्चार्ज हुई आयुष्मान कार्डधारी मनीषा पति गोविंद का 8 हजार रुपए का बिल बना है। जबकि बगैर कार्डधारी की मुफ्त डिलीवरी हो गई। बुखार, उल्टी-दस्त आदि पर ही करीब 1500 वसूल लिए जा रहे हैं।

सिर्फ जिला अस्पताल को एक करोड़ का भुगतान

उज्जैन जिले के सभी शासकीय अस्पतालों में हर दिन 200-250 मरीजों का आयुष्मान कार्ड से इलाज होता है। माधवनगर में 30-35 कार्डधारी इलाज करवाते हैं। जबकि जिला अस्पताल में हर दिन 40-50 मरीजों का इलाज हो रहा है। यह आंकड़ा महीने में औसतन 1 हजार पहुंच जाता है। इसके बदले हर 3 माह में उज्जैन अस्पताल को ही मुख्यालय का 60% हिस्सा काटने के बाद औसतन 90 लाख से 1 करोड़ रुपए का भुगतान मिल रहा है।

कांसेप्ट यह था : गरीबों को निजी अस्पतालों में मुफ्त उपचार सुविधा

आयुष्मान कार्ड का कांसेप्ट गरीब लोगों को मुफ्त में बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है। चूंकी सरकारी अस्पतालों में तो पहले से ही फ्री उपचार होता है। इसलिए यह प्लान निजी अस्पतालों के लिए शुरू किया था, ताकि गरीब व्यक्ति भी निजी अस्पताल में इलाज करवा सके। इलाज में होने वाले 5 लाख रुपए तक के खर्च का भुगतान सरकार करती है, लेकिन सरकार का फोकस अब कार्डधारियों को उपचार प्राइवेट अस्पताल के बजाय सरकारी में दिलाने की प्राथमिकता हो गई।

आयुष्मान राशि का ऐसे होता है बंटवारा आयुष्मान कार्ड से इलाज की राशि का 60% हिस्सा मुख्यालय रखता है। 40% अस्पतालों को जारी कर दी जाती है। 40% राशि में से 60% अस्पताल की रोकस के खाते में जमा होती है। बाकी 40% डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक के लिए अलग-अलग फिक्स है।

राशि रोकस से सुविधाओं पर करते खर्च

सरकारी अस्पताल में फ्री इलाज दिया जाता है। आयुष्मान कार्ड के जरिये जो राशि मिलती, उसका उपयोग रोकस के माध्यम से अस्पताल की सुविधा पर खर्च होता है। निजी अस्पतालों में भी आयुष्मान कार्ड से इलाज हो रहा है। – डॉ. ​एके पटेल, सीएमएचओ



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