MP का सबसे गर्म शहर नौगांव, पारा 46.8 डिग्री:नई अस्पताल बिल्डिंग में कूलर बंद मिले; वाटर कूलर से आ रहा गर्म पानी मरीज परेशान




छतरपुर जिले का नौगांव शुक्रवार को मध्यप्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। यहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में सड़कें सूनी पड़ी रहीं, लोग घरों में कैद रहे और मोबाइल पर लगातार हीट वेव के अलर्ट आते रहे। भीषण गर्मी के बीच लोगों की उम्मीद सरकारी अस्पताल से थी, लेकिन नया सिविल अस्पताल खुद अव्यवस्थाओं और लापरवाही से जूझता नजर आया। करीब डेढ़ महीने पहले शुरू हुई करोड़ों रुपए की नई अस्पताल बिल्डिंग में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित इमरजेंसी वार्ड में एसी चल रहे हैं, जिससे कुछ राहत महसूस होती है, लेकिन महिला और पुरुष वार्डों में गर्म हवा और उमस मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। वार्डों में लगे कूलर बंद पड़े हैं और कई कूलरों में पानी तक नहीं है। मरीज और उनके परिजन हाथ से पंखा झलते नजर आए। गर्मी के कारण मरीज भर्ती होने से बच रहे अस्पताल स्टाफ ने भी माना कि ऊपर के वार्डों में अत्यधिक गर्मी होने के कारण मरीज भर्ती होने से बच रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में ठंडी हवा तक की व्यवस्था नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है। शाम होते ही अस्पताल में डॉक्टरों की कमी भी साफ नजर आई। इमरजेंसी में केवल एक डॉक्टर मौजूद मिले, जबकि बाकी अस्पताल लगभग डॉक्टर विहीन दिखाई दिया। स्टाफ के अनुसार कई डॉक्टर शाम के समय अस्पताल नहीं पहुंचते, जिससे मरीजों को मजबूरी में उनके घर तक जाना पड़ता है। इससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ जाती है। अस्पताल में पीने के पानी की व्यवस्था भी बदहाल मिली। नया वाटर कूलर ठंडे पानी की जगह गर्म पानी दे रहा था। वहीं पुराने अस्पताल भवन में अब भी दो से तीन वाटर कूलर रखे हुए हैं। नई बिल्डिंग में जरूरी संसाधन पूरी तरह शिफ्ट नहीं हो पाए हैं। कई हफ्तों से बंद पड़ी लिफ्ट करोड़ों रुपए की लागत से बनी नई बिल्डिंग की लिफ्ट कई हफ्तों से बंद पड़ी है। मरीजों को स्ट्रेचर के सहारे सीढ़ियों से ऊपर ले जाना पड़ रहा है। बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गुटखे की पीक, धूल और गंदगी दिखाई दी। कुछ सप्ताह पहले नीति आयोग की टीम ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की सफाई और व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी। रिपोर्ट में अस्पताल की हालत पर भी सवाल उठाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक शाम के समय आने वाले कई डिलीवरी केस निजी अस्पतालों की ओर रेफर किए जा रहे हैं। इससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। प्रभारी बीएमओ डॉ. विक्रम यादव ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को जल्द सुधारा जाएगा और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी।



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