PM-मोदी की पेट्रोल बचाने की अपील पर कटनी में बहस:विधायक ने पैदल मार्च कर जानी राय; जनता बोले- अपील नहीं, मंहगाई नियंत्रण करना चाहिए




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के आह्वान का असर कटनी में दिख रहा है। जिले में लोगों के विचार दो धड़ों में बंटा नजर आ रहा है। पीएम की ओर से पेट्रोल, डीजल और सोने की खरीद में कटौती की अपील पर राजनीतिक गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक बहस छिड़ी हुई है। एक ओर जहां भाजपा के जनप्रतिनिधि इसे राष्ट्र निर्माण का यज्ञ बता रहे हैं, वहीं आम जनता इसे आर्थिक विवशता पर सरकारी पर्दा मान रही है। इस अपील को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक वीरेंद्र बहादुर सिंह स्वयं सड़क पर उतरे। विधायक बोले-पेट्रोल-डीजल की बचत मुद्रा को बचाएगी विधायक सिंह ने पैदल ही पूरे बड़वारा नगर का भ्रमण किया और नागरिकों से संवाद कर देशहित में त्याग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब देश को हमारी जरूरत होती है, तो छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव लाते हैं। पेट्रोल-डीजल की बचत सीधे तौर पर देश की मुद्रा को बचाएगी। उनके साथ मौजूद स्थानीय निवासी सतीश दुबे ने भी कहा कि संकट की हर घड़ी में भारत की जनता एकजुट हुई है और इस बार भी हम देशहित में पीछे नहीं हटेंगे। सरकार विफलता का बोझ जनता पर डाल रही वहीं, समाज का एक बड़ा वर्ग इस अपील को सरकार की कूटनीतिक और आर्थिक विफलता के रूप में देख रहा है। जागरूक नागरिकों का तर्क है कि यदि सरकार की विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन सुदृढ़ होता, तो आम आदमी से अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती करने की अपेक्षा नहीं की जाती। क्षेत्रीय युवा छोटू आदिवासी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं का बोझ 140 करोड़ जनता पर डाल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ रैलियों में वीआईपी और मंत्रियों की गाड़ियों के बड़े-बड़े काफिले दौड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी से पैदल चलने को कहा जा रहा है। यह जनता के साथ छलावा है। सोना अब निवेश नहीं असंभव सपना है कटनी के बाजार और रिहायशी इलाकों में हमने जमीनी स्तर पर पड़ताल की। कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आईं ​ईंधन की मार मध्यम और अन्य वर्ग के लोगों का कहना है कि वे पहले ही मजबूरी में वाहन चला रहे हैं। पेट्रोल की कीमतें इतनी अधिक हैं कि कटौती अपील से नहीं, बल्कि खाली जेब के कारण स्वतः ही हो चुकी है। शादी-ब्याह के सीजन में भी सर्राफा बाजार में सन्नाटा है। सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है। मध्यम वर्ग के लिए अब सोना निवेश नहीं, बल्कि एक असंभव सपना बनता जा रहा है। सरकार को अपील की बजाय मंहगाई नियंत्रण करना चाहिए ​स्थानीय युवाओं का कहना है कि जब आय का कोई स्थायी जरिया ही नहीं है, तो बचत की बात करना बेमानी है। लोगों का मानना है कि सरकार को अपील करने के बजाय महंगाई पर नियंत्रण और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ​कटनी जिले में प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर उत्साह कम और चिंता अधिक है। लोग इसे केवल देशभक्ति के चश्मे से नहीं देख पा रहे, क्योंकि उनकी दैनिक आजीविका के संकट ने राष्ट्रवाद की परिभाषा को आर्थिक विवशता में बदल दिया है।



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