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भास्कर के स्टिंग में इंदौर की अवैध कंसल्टेंसी एजेंसियों का नेटवर्क सामने आया। एजेंट हेल्पर, ड्राइवर और लेबर की नौकरी का झांसा देकर युवाओं को विदेश भेजने के बदले प्रति व्यक्ति 1 लाख रुपए लेते हैं। एक एजेंट बिना प्रोफाइल के जर्मनी में नौकरी दिलाने का दावा करता है।
जांच में पता चला कि इन एजेंसियों का भारत सरकार के ई-माइग्रेट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं है। मध्य प्रदेश की सिर्फ दो एजेंसियां ही इस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं। रिपोर्टर ने 47 युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर एजेंटों से संपर्क किया, जहां प्रोफाइल और पासपोर्ट तक तैयार कराने के दावे किए गए। रिपोर्ट बताती है कि पंजाब के बाद मध्य प्रदेश भी अवैध माइग्रेशन का नया सेंटर बनता जा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट….

स्टिंग-1: ‘इंदौर के थानों में मेरा चेहरा चलता है, नाम नहीं’
स्थान: न्यू बाबजी कंसल्टेंसी, इंदौर
एजेंट- अब्बास भाई
भास्कर टीम इंदौर के मंगल सिटी मॉल स्थित न्यू बाबजी कंसल्टेंसी पहुंची। रिपोर्टर ने खुद को राजस्थान की कंसल्टेंसी का संचालक बताकर 47 युवाओं को विदेश भेजने की बात की। अब्बास भाई ने दावा किया कि युवाओं को पहले टूरिस्ट वीजा पर भेजा जाएगा और बाद में वहां वर्क वीजा बनवा दिया जाएगा।
उसने प्रोफाइल, पासपोर्ट और मंत्रालयों तक पहुंच होने की बात भी कही। ये भी कहा- ‘इंदौर के थानों में मेरा चेहरा चलता है, सब पैसा खाते हैं।’

रिपोर्टर से डील करने के बाद अब्बास भाई ने किसी को फोन लगाया और कहा 47 लड़कों को भेजना है।
आरोपियों को विदेश भेजने का दावा
अब्बास भाई ने दावा किया कि उसने करोड़ों के गबन के आरोपी एक प्रोफेसर को विदेश भेजा था। उसके कर्मचारी ने यह भी कहा कि हमने ‘मोहन शेखर’ नाम के एक व्यक्ति को विदेश भेजा, जिस पर मर्डर के 28 केस दर्ज थे। मुकदमा हो तो भी 40-50 हजार एक्स्ट्रा देकर 10 साल का पासपोर्ट बनवा देंगे। हमारे पास सब जादू है।
NSA के फरार आरोपी को विदेश भेजने की डील
रिपोर्टर ने खुद को राजस्थान के एक फरार आरोपी का करीबी बताया, जिस पर NSA और हथियार तस्करी के मामले दर्ज होने की बात कही। बातचीत के दौरान अब्बास भाई ने प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। बातचीत में अब्बास भाई ने कथित तौर पर फर्जी पते, आधार अपडेट, बैंक दस्तावेज और तत्काल पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया समझाई।
उसने दावा किया कि इंदौर के पते पर दस्तावेज तैयार कर कम समय में पासपोर्ट बनवाया जा सकता है।

स्टिंग-2: जर्मनी जाने के लिए 12 लाख का ‘फर्जी फंड’
स्थान: गो वीजा कंसल्टेंसी, इंदौर
एजेंट- कुलजोत सिंह
भास्कर टीम सपना-संगीता रोड स्थित गो वीजा कंसल्टेंसी पहुंची। संचालक कुलजोत सिंह ने दावा किया कि उनकी एजेंसी के जरिए कई युवा विदेश में बस चुके हैं। ऑफिस में विभिन्न देशों के झंडे और युवाओं की तस्वीरें लगी थीं।

कुलजीत सिंह ने एमबीए स्टूडेंट्स को विदेश भेजने की पूरी प्रोसेस बताई।
बैंकिंग नेटवर्क के जरिए फंड दिखाने का दावा
कुलजोत सिंह ने बताया कि जर्मनी के अपॉरच्युनिटी कार्ड के लिए बैंक खाते में 12 लाख रुपए का फंड दिखाना जरूरी होता है। उसने दावा किया कि निजी बैंकों के जरिए शुल्क लेकर खाते में अस्थायी फंड दिखाया जाता है। बातचीत में अनुभव प्रमाण पत्र और बैंक स्टेटमेंट तैयार कराने की भी बात सामने आई।

स्टिंग 3: एडमिशन के नाम पर कमीशन मॉडल का खुलासा
स्थान: भृगु स्टडी एब्रॉड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल
एजेंट- तन्मय शर्मा
भोपाल की भृगु स्टडी एब्रॉड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के संचालक तन्मय शर्मा ने बताया कि स्पेन और कनाडा जैसे देशों में छात्रों को भेजने पर एजेंसियों को प्रति छात्र कमीशन मिलता है। उन्होंने स्पेन में MBA एडमिशन की प्रक्रिया और लगभग 11 लाख रुपए के खर्च का भी जिक्र किया।

तन्मय शर्मा ने रिपोर्टर से कहा उन्हें 1 लाख कमीशन मिलता है, चाहे तो ज्यादा भी ले सकते हैं।
यूनिवर्सिटी टाई-अप के दस्तावेज साझा नहीं किए गए
तन्मय शर्मा ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए किसी विशेष लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कई विदेशी यूनिवर्सिटियों से टाई-अप होने का दावा किया, लेकिन संबंधित दस्तावेज नहीं दिखाए। ई-माइग्रेट पोर्टल पर भृगु ग्लोबल वीजा कंसल्टेंसी के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज मिलीं। इसके बाद संस्था का नाम बदलने की जानकारी भी सामने आई।

दो केस से समझें अवैध नेटवर्क की हकीकत
केस1: भोपाल के जितेंद्र अहिरवार को टेलीग्राम पर डेटा एंट्री नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया गया। बाद में उसे म्यांमार ले जाकर कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क में बंधक बनाकर काम कराया गया। रेस्क्यू के बाद वह भारत लौट सका। यह मामला मध्य प्रदेश में ऐमिग्रेशन एक्ट के तहत दर्ज पहला केस बना।
केस2: भोपाल की साहिदा (बदला हुआ नाम) को फेसबुक के जरिए नौकरी का झांसा देकर शारजाह भेजा गया। आरोप है कि बाद में उसे ओमान में बंधक बनाकर जबरन काम कराया गया और प्रताड़ित किया गया। मदद के लिए उसने खून से संदेश लिखकर नीचे फेंका। कई मुश्किलों के बाद वह भारतीय दूतावास पहुंच सकी और भारत लौट आई।

अवैध माइग्रेशन नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत
REDIO के चेयरमैन और राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के प्रेसिडेंट प्रेम भंडारी का कहना है कि कबूतरबाजी का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है। एजेंट विदेश में ड्राइवर और कारपेंटर जैसी नौकरियों का झांसा देकर लोगों को भेजते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनसे अलग तरह के काम कराए जाते हैं।
कई मामलों में पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं, वेतन नहीं दिया जाता और लोगों को बंधक जैसी स्थिति में रखा जाता है। भंडारी के मुताबिक इस नेटवर्क का इस्तेमाल अपराधियों को देश से बाहर भेजने के लिए भी किया जाता है, जिसमें फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट का उपयोग होता है।
उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राज्यों से पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों को सक्रिय करने की मांग की। प्रेम भंडारी के अनुसार, इस नेटवर्क का प्रमुख माध्यम विदेश नौकरी और माइग्रेशन से जुड़े विज्ञापन हैं।















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