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छिंदवाड़ा जिले के लावाघोगरी थाना क्षेत्र अंतर्गत निब्बूखेड़ा गांव में 10 हजार रुपए की मजदूरी के विवाद में एक व्यक्ति ने अपने ही तीन वर्षीय रिश्ते के पोते का अपहरण कर लिया। पुलिस ने पांच दिन तक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में तलाश कर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया है, साथ ही आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। रात में साथ भोजन किया, फिर दिया वारदात को अंजाम
महाराष्ट्र के सावनेर निवासी मुत्रा उर्फ मौजा बरकड़े 5 मई को निब्बूखेड़ा स्थित अपने रिश्तेदारों के घर आया था। रात में सभी ने साथ में भोजन किया और सो गए। देर रात आरोपी ने उस समय तीन साल के बच्चे को अगवा कर लिया, जब वह अपने असली दादा के पास सो रहा था। अगली सुबह बच्चे के न मिलने पर परिजनों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। कपास तुड़ाई के पैसों को लेकर था विवाद
पूछताछ में आरोपी मुत्रा बरकड़े ने बताया कि उसने कुछ समय पहले इस परिवार के यहां 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कपास तुड़ाई का काम किया था। उसका आरोप है कि काम पूरा होने के बावजूद उसे 10 हजार रुपए की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। इसी बकाया रकम को वसूलने के लिए उसने अपहरण की यह साजिश रची और बच्चे को अपने साथ महाराष्ट्र ले गया। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से पकड़े गए आरोपी
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने तीन अलग-अलग टीमें गठित की थीं। इन टीमों ने दोनों राज्यों के तीन जिलों में सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने सावनेर में दबिश देकर आरोपी मुत्रा और उसकी पत्नी उर्मिला बरकड़े को पकड़ लिया। पुलिस ने मासूम को उसके असली दादा को सौंप दिया है। मामले का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।
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